फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

विज्ञापन
1 of 10
मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए जगबीर का उनके गांव में रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। सातवीं में पढ़ने वाले उनके बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। (सभी फोटो: अमित/ अमर उजाला ब्यूरो)
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

2 of 10
अपनी छोटी बहन और मां की देखभाल के लिए अब विवेक अकेला बचा है। विवेक को नहीं पता कि परिवार कैसे चलेगा क्योंकि अभी तो वह सातवीं में पढ़ता है और फिलहाल मां बेसुध पड़ी हैं।
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

3 of 10
जगबीर के परिवार में अब उनकी पत्नी मंजू, बेटा विवेक और बेटी रेनू बची हैं। जगबीर का बेटा विवेक हिंडन एयरफोर्स स्टेशन स्थित केंद्रीय विद्यालय-2 में आठवीं और बेटी रेनू सातवीं क्लास में पढ़ती है।

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

4 of 10
पड़ोसियों ने बताया कि जगबीर का जल्द ही ट्रांसफर होने वाला था। ऐसे में वह पत्नी और बच्चों को पास ही के अपने साढ़ू के मकान में शिफ्ट करने वाले थे। हालांकि इससे पहले ही वह शहीद हो गए।
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

5 of 10
गौतमबुद्ध नगर जनपद के रबूपुरा क्षेत्र के मुरादगढ़ी गांव निवासी जगबीर भी देश के उन 18 जांबाज जवानों से में थे जो मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए।
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

6 of 10
जेवर तहसील के मुरादगढ़ी निवासी स्वं. होतीलाल के पुत्र जगबीर के शहीद होने की सूचना शुक्रवार सुबह पैतृक गांव में आई थी। परिवार के लोगों ने इसकी जानकारी उसकी पत्नी, बच्चे और मां को नहीं दी थी। उन्हें बताया गया था कि उग्रवादियों से मुकाबला करने के दौरान जगबीर घायल हुए हैं।
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

7 of 10
जगबीर 24 जून 1994 में सेना की सिग्नल रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 15 नवंबर 1996 में उनकी शादी सूरजपुर कस्बे की मंजू के साथ हुई थी। हाल ही में वे असम के मणिपुर में तैनात थे। पत्नी मंजू और बेटा-बेटी के साथ साहिबाबाद के लाजपत नगर के मकान नंबर ए-117 में रहती है।

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

8 of 10
जगबीर देश की सेवा करने के लिए गांव आने पर युवाओं को प्रेरित करते रहते थे। 15 अगस्त 2014 को चीफ ऑफ द आर्मी स्टाल का मेडल देकर सेना में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था। 2012 में यूएनओ मेडल से भी सम्मानित किया गया।

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

9 of 10
जगबीर ने गांव में ही स्थित प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई की थी। हाईस्कूल की शिक्षा पड़ोसी गांव आकलपुर स्थित इंटर कालेज और इंटर की शिक्षा गांव पल्सेडा जिला अलीगढ़ से की। बीसीए की पढ़ाई खुर्जा से की थी। जगबीर के भाई उदयवीर शर्मा (50) हरियाणा के बल्लभगढ़ में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं।
विज्ञापन

PHOTOS: अब सिर्फ यही रही गई है पिता की निशानी

10 of 10
अंतिम संस्कार के मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी ने जगबीर के परिवार को 15 बीघे जमीन का पट्टा देने की घोषणा की। साथ ही 20 बीघे में शहीद पार्क के निर्माण की घोषण की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें