शहीद की पत्नी नीतू सिंह और उनके बेटे का दुख देखकर अंतिम संस्कार में आए लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। दो दिनों से बदहाल नीतू रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान पतला इंटर कालेज में पहुंचीं तो उन्होंने पति का माथा चूम लिया और बेटे को भी पिता का आशीर्वाद लेने के लिए कहा। इसके बाद रोते बिलखते हुए नीतू के बेटे अंश ने मां के साथ पिता को सैल्यूट कर जय हिंद बोला। यह देख पतला कालेज का ग्राउंड जय हिंद के नारों से गूंज उठा।
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martyr vinod kumar
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को जब पति विनोद कुमार की शहादत की खबर नीतू ने सुनी तो वह गश खाकर गिर पड़ीं। तब से ही उनका रो-रोकर बुरा हाल था। रविवार दोपहर जैसे ही विनोद का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो सेना के जवानों ने सबसे पहले पति को नीतू को दिखाया, जिसके बाद वह पति के शरीर से लिपटकर काफी देर तक रोती रहीं।
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इसके बाद सीआरपीएफ के जवान सेना के ट्रक से पार्थिव शरीर को लेकर इंटर कालेज के ग्राउंड तक पहुंचे, जहां उन्हें जवानों और डीएम-एसएसपी ने सलामी दी। इस बीच पत्नी नीतू वहां आ गईं और उन्होंने सलामी के बीच अपने पति का रोते हुए माथा चूमा। वहीं, जब शहीद का पार्थिव शरीर चिता पर रखा गया तो पंडित ने अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं कराईं। पंडित द्वारा दिए गए हर फूल को नीतू ने चूम-चूम कर चिता पर चढ़ाया। इसके बाद उन्होंने बेटे अंश के साथ सैल्यूट कर जांबाज पति को सलामी दी और जय हिंद बोला। यह देख पूरा ग्राउंड पर जय हिंद और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
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मुझे एक बार और मिलने दो...
नीतू रोते हुए बोल रही थी कि उन्हें एक बार और अपने पति को देख लेने दो, कोई उसे मत पकड़ो और उसे छोड़ दो, ताकि वह उनके पास जा सके। हालांकि परिवार के लोगों ने उन्हें संभाला।
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मोदीनगर विधायक मंजू सिवाच ने निभाया बड़ी बहन का फर्ज
मोदीनगर विधायक मंजू सिवाच शनिवार से ही शहीद विनोद कुमार के घर पर रुकी थीं। उन्होंने इस बीच एक बड़ी बहन होने का नाता निभाया। उन्होंने जिस महिला को रोते-बिलखते हुए देखा उसी के पास जाकर उसे पहले गले लगाया और समझाकर शांत कराया। उन्होंने कहा कि विनोद अमर हुआ है, उसे देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने शहीद के परिवार को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
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गम में डूबा रहा शहीद का परिवार
पतला गांव में शुक्रवार शाम से ही सन्नाटा फैला रहा। पूरे परिवार के साथ-साथ पूरा गांव शहीद की याद में दिनभर रोता रहा। इस दौरान सीआरपीएफ अलीगढ़ स्थित में तैनात शहीद विनोद की भतीजी अनीता शनिवार को गांव में पहुंची। वह अपनी चाची नीतू से मिलकर खूब रोई। रविवार को उसकी तबियत बिगड़ गई, जिसके चलते वह कई बार बेहोश हो गई। हालांकि अंतिम समय में अनीता ने अपना जज्बा दिखाया और जमकर देश हित में सीआरपीएफ जिंदाबाद की नारेबाजी की।
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विनोद के भतीजे सचिन चौधरी ने बताया कि अनीता चौधरी शुरू से ही अपने चाचा विनोद के परिवार के पास रही है। यही रहकर उसने पढ़ाई की। उन्हें देखकर ही उसने सीआरपीएफ की तैयारियां की, जिसके बाद उसका चयन हुआ। वर्तमान में वह अलीगढ़ आरएएफ में तैनात है। उसे जैसे ही चाचा की मौत की खबर मिली तो वह गाजियाबाद आ गई। इसके बाद से उसके तबियत बिगड़ गई, लेकिन जब अंतिम संस्कार हो रहा था तो उसने अपने एक सैनिक होने का फर्ज पूरा किया और विनोद अमर रहे, जय हिंद और सीआरपीएफ जिंदाबाद के नारे लगाए।
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गांव में 800 मीटर की दूरी तय करने में लगा पौन घंटा
शहीद विनोद कुमार की अंतिम यात्रा को मुरादनगर गंगनहर से घर तक पहुंचने में दो घंटे लग गए। युवाओं के काफिला बढ़ता गया और वाहनों की रफ्तार कम होती गई। गांव में पहुंचकर काफिले की लंबाई और बढ़ गई। गांव के प्रवेश द्वार से घर तक की महज 800 मीटर की दूरी तय करने में सीआरपीएफ के वाहनों को करीब पौन घंटा लग गया।
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सुबह 11:10 बजे शहीद का पार्थिव शरीर पतला गांव के मुहाने पर पहुंच गया था, लेकिन 40 मिनट बाद 11:50 बजे घर पहुंचा।शहीद विनोद कुमार की अंतिम विदाई में सिर्फ पुरुष और युवा वर्ग ही नहीं महिलाएं व बच्चे भी शामिल हुए। गांव में चारों ओर तिरंगे लहरा रहे थे। सुबह से ही गांव के लोग शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे।
जैसे ही उन्हें निवाड़ी पुल के पास सीआरपीएफ का ट्रक आता देखा तो उसकी ओर दौड़ पड़े। आगे-आगे पार्थिव शरीर को लेकर ट्रक चल रहा था और पीछे-पीछे लोगों का काफिला था। सुबह 11:50 बजे पार्थिव शरीर विनोद के घर पहुंचा तो लोगों की भीड़ अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी। करीब आधे घंटे बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।