कुमार विश्वास
उन्होंने लिखा है कि-'अपने-अपने दलों में हर संभव तरीक़े से लोकतंत्र की बहुधा निर्मम हत्या करने वाले हमारे नेता जब-जब “लोकतंत्र ख़तरे में है ,लोकतंत्र बचाओ, लोकतंत्र मज़बूत करो” ,जैसे प्रलाप निहायत बेशर्मी के साथ करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हाफ़िज़ सईद , विश्व-शांति पर प्रवचन कर रहा हो...'