इसके पीछे का कारण है हजरत निजामुद्दीन औलिया। वह चिश्ती घराने के चौथे संत थे। उनकी दरगाह पश्चिमी दिल्ली में स्थित है। उनके एक प्रसिद्ध शिष्य अमीर खुसरो थे। शायद ही ऐसा कोई हो जो पहले उर्दू शायर खुसरो को ना जानता हो। दोंनों ही गुरू शिष्यों की दरगाह और मकबरा आमने सामने ही बने हुए हैं। दरगाह में यूं तो बाकी दिन हरे रंग की चादर चढ़ाई जाती है पर बसंत पंचमी पर यहां पीले रंग के फूल भी चढ़ाए जाते हैं। साथ ही यहां बसंत के गाने भी गाये जाते हैं।