डीडीसीए घोटाला मामले में मानहानि के मुद्दे पर अरुण जेटली ने मुख्यमंत्री और उनके सह-आरोपियों को घेरने के लिए मंझे हुए रणनीतिकार की तरह कानूनी बिसात बिछाई है। जेटली ने गवाही देने के लिए नेताओं और पत्रकारों को कानूनी रणनीति का हिस्सा बनाया है।
(धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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कोर्ट में खुद को बचाने के लिए जेटली ने बिछाई है खास बिसात
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मुख्यमंत्री केजरीवाल के आरोपों का जिस तरह से कानूनी व सियासी दिग्गज जेटली ने जवाब देना शुरू किया है उससे लगता है कि वह इस लड़ाई को काफी आगे लेकर जाएंगे। जेटली बनाम केजरीवाल की इस लड़ाई में आने वाले समय में कई बड़े नामचीन अदालत में गवाही देने आ सकते हैं। इस कड़ी में जेटली ने अपने पुराने मित्र व जनता की अदालत के प्रस्तुतकर्ता रजत शर्मा को अपने पक्ष में गवाही के लिए बुलाया।
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रजत शर्मा ने अपने बयान में कहा कि जेटली पर लगाए गए वित्तीय गड़बड़ी के आरोप झूठे हैं। सुनवाई के समय केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, जितेंद्र कुमार, राज्यसभा सांसद भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर आरती मेहरा, नूपुर शर्मा सहित भाजपा के अन्य नेता मौजूद थे। इनके अलावा अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, अनिल सोनी, अजय दिकपॉल, नीरज गुप्ता, दिल्ली बार काउंसिल सदस्य राजेश मिश्रा समेत भारी संख्या में वकील मौजूद थे।
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रजत शर्मा ने अपने बयान में कहा कि वह 32 साल से पत्रकार हैं और 42 वर्षों से अरुण जेटली के मित्र हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में साथ पढ़ते थे और तभी से उनकी मित्रता है।
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जब उन्हें 57 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की जानकारी मिली तो उन्हें जेटली की छवि को हुए नुकसान के बारे में सोचकर बेहद दुख हुआ। इन आरोपों पर जेटली व उनके परिवार से पूछा तो पता चला कि यह पूरी तरह झूठे व बेबुनियाद हैं।
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जेटली ने कहा कि अखबारों और चैनलों पर प्रसारित खबरों के बारे में रजत शर्मा व स्वपनदास गुप्ता, अधिवक्ता बख्शी, रंग सिंह, वेद प्रकाश शर्मा, अधिवक्ता संजीव नरुला, यतीन शर्मा ने उनसे पूछा।