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ऑक्सफॉर्ड में पढ़ाई से ज्यादा बोर्ड गेम खेलने वाले स्टीफन हॉकिंग कैसे बने वैज्ञानिकों के बादशाह

Wed, 14 Mar 2018 02:15 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Stephen Hawking
दुनिया को बिग बैंग थियरी देने वाले स्टीफन हॉकिंग आज हमारे बीच नहीं रहे। 76 साल की उम्र में बुधवार को स्टीफन का निधन हो गया। 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में जन्मे हॉकिंग बिग बैंग और ब्लैक होल्स से दुनिया का परिचय कराया जिसे कोई नहीं जानता था। ऐसे ही खास वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग के बारे में जानिए बेहद दिलचस्प बातें:
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stephen Hawking - फोटो : HAWKING.ORG.UK
सिर्फ एक घंटे ही करते थे पढ़ाईः हॉकिंग शुरू से ही मैथ पढ़ना चाहते थे जबकि उनके पिता चाहते थे कि वो मेडिकल पढ़ें। यही कारण रहा कि जब वो मैथ्स नहीं पढ़ पाए तो उन्होंने फिजिक्स चुन लिया। ऑक्सफॉर्ड में वो पढ़ाई कम और बोर्ड गेम ज्यादा खेलते थे। तीन साल में उन्होंने केवल 1000 घंटे यानी रोज 1 घंटे ही पढ़ाई की। लेकिन आश्चर्य तो ये था कि इसके बावजूद वो अच्छे स्टूडेंट्स में से गिने जाने लगे।
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stephen Hawking
जब उन्होंने अपनी फाइनल थीसिस जमा की तो उसे फर्स्ट क्लास ऑनर्स और सेकंड क्लास ऑनर्स के बीच रखा गया और दोनों में से एक पाने के लिए उन्हें मौखिक परीक्षा देनी थी। तब उन्होंने अपने शिक्षकों से कहा था कि अगर आप मुझे पहला स्थान देंगे तो कैंब्रिज जाऊंगा और सेकंड दिया तो यहीं ऑक्सफॉर्ड रह जाऊंगा तो आप ही तय करें। इसके बाद उन्हें फर्स्ट क्लास ऑनर्स की ही डिग्री दी गई।

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stephen Hawking
1968 में  कॉस्मोलॉजी में पीएचडी करने के बाद भी उन्होंने कैंब्रिज नहीं छोड़ा। अपनी लाइलाज बीमारी से ग्रसित होते हुए भी उन्होंने कैंब्रिज में रहकर ही ब्रह्मांड से जुड़े कुछ मूल सवालों की खोज करने लगे। एक दशक बाद उन्होंने कॉस्मोलॉडी और थ्योरेटिकल फिजिक्स पर बेहद ही खास रिपोर्ट निकाली। इन रिपोर्ट्स ने उन्हें वैज्ञानिकों की दुनिया का बेताज बादशाह बना दिया।
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Stephen Hawking on Theory of Universe
स्टीफन हॉकिंग 1988 में पहली बार उस वक्त चर्चा में आए थे जब उनकी पहली किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइमः फ्रॉम बिग बैंग टू ब्लैक होल्स' बाजार में आई। इस किताब ने हिस्ट्री बनाई और इसकी 1 करोड़ से भी ज्यादा प्रतियां बिकीं। हॉकिंग की यह किताब दुनियाभर में साइंस विषय पर सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है।
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stephen Hawking
लाइलाज बीमारी में जिए कई सालः बता दें कि प्रोफेसर हॉकिंग को मोटर न्यूरॉन नाम की बीमार थी। यह बीमारी उन्हें 1963 में हुई थी। डॉक्टर ने उन्हें कहा था कि वो दो साल ही जी पाएंगे, लेकिन हॉकिंग ने हार नहीं मानी। इसमें उनके पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया सिर्फ एक दिमाग ही था जो कार्य कर रहा था। कहा जाता है कि वो शायद दुनिया के एकमात्र इंसान थे जो इस बीमारी के बावजूद लंबे समय तक जिंदा रहे।
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Stephen Hawking
प्रोफेसर हॉकिंग के जीवन पर 2014 में 'द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग' नाम से एक फिल्म भी बनी है। यह जानना दिलचस्प होगा कि इस फिल्म में हॉकिंग का किरदार निभाने वाले अभिनेता एडी रेडमेन को बेस्ट एक्टर का ऑस्कर भी मिला था।
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