दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में आग लगने से 43 लोगों की मौत की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि रविवार देर रात किराड़ी में एक तीन मंजिला मकान में भीषण आग लग गई। आग से एक ही परिवार के पांच लोगों समेत नौ लोगों की मौत हो गई। वहीं दो मासूम और एक महिला गंभीर रूप से झुलस गए। आग की सूचना मिलते ही दमकल की सात गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और इमारत में फंसे सभी 12 लोगों को निकालकर संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया। जहां नौ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया।
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मौके पर भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पहली मंजिल पर फंसे उदयकांत ने मौत से पहले अपने भाई, बहन और अन्य लोगों को फोन कर बचाने की गुहार लगाई थी। उसके भाई संजीव ने बताया कि रात में उदयकांत का फोन आया। उसने फोन पर बताया कि उसका दम घुट रहा है, उसे बचा लो। पीछे से अन्य लोगों के कराहने की आवाजें आ रही थीं और शोर भी हो रहा था। संजीव ने पूछा कि क्या हुआ है, तो उसने बताया कि उसके मकान में आग लग गई है और दरवाजा नहीं खुल रहा है। संजीव भागकर उसके घर के पास पहुंचा। उसने देखा कि गोदाम से आग की लपटें ऊपर की मंजिल पर जा रही थीं। उन लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए।
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मौके पर जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
घायलों की हालत में सुधार
हादसे में घायल पूजा, उनकी बेटी आराध्या और भतीजी सौम्या की हालत में सुधार है। पूजा और उनकी बेटी को धुएं की वजह से सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। रेलिंग पकड़ने की वजह से सौम्या पंद्रह फीसदी झुलस गई थी। तीनों का किराड़ी के तोमर नर्सिंग होम में इलाज चल रहा है।
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मौके पर जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
नहीं मिली दरवाजे पर लगे ताले की चाबी
धुएं की चपेट में आने के बाद पहली मंजिल पर रहने वाले लोगों ने इमारत से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर लगे ताले का चाबी नहीं मिलने पर वह अपने कमरे में लौट गए। वे खुद को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन धुआं ज्यादा हो जाने की वजह से अचेत हो गए।
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किराड़ी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
बहादुरी दिखाकर तीन लोगों को बचाया
स्थानीय निवासी रचना ने बताया कि आग लगने के शोर पर वह अपने घर से भागकर मौके पर आईं। उन्होंने देखा कि पूजा छत से बचाने की गुहार लगा रही है। उनके पड़ोसी देवेश पाठक, नरेंद्र व अन्य लोगों की मदद लेकर वे तुरंत सबमर्सेबल पंप में पाइप लगाकर आग बुझाने की कोशिश करने लगीं। बिजली कटने की वजह से वह आग को बुझा नहीं पाए। पूजा व उनके बच्चों को बचाने के लिए उन्होंने सीढ़ी का इंतजाम किया। रचना ने बताया कि उन्हें मलाल है कि वह घर में मौजूद अन्य लोगों को नहीं बचा पाईं।
हादसे व साजिश को कोण से होती है तफ्तीश
आग लगने के बाद पुलिस हादसे और साजिश दोनों कोण से तफ्तीश करती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आग के कारणों की जांच के दौरान मूल कारण तक पहुंचना काफी मुश्किल होता है। आग लगने से कई सबूत नष्ट हो जाते हैं। इसके लिए पुलिस की क्राइम टीम मौके का मुआयना करती है। साथ ही एफएसएल की टीम को भी जांच के लिए बुलाती है। इलेक्ट्रिकल एक्सपर्ट से भी मौका मुआयना कराया जाता है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद चश्मदीदों का बयान इसमें शामिल किया जाता है। उसके बाद आग के कारण का नतीजा निकाला जाता है।