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अपहरणकर्ता दीप्ति से बोल रहे थे, चुपचाप चलो किसी से मिलवाना है

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36 घंटे अपहरणकर्ताओं की कैद में रहने के बाद घर लौटकर आई स्नैपडील की कंपनी सेक्रेटरी दीप्ति सरना शुक्रवार सुबह जब अपने घर लौटी तो पूरा शहर जैसे उसकी खुशी में झूम उठा। दीप्ति के सकुशल होने का समाचार जिसने भी सुना उसने भगवान का शुक्रिया अदा किया। दीप्ति को लेने जहां उसके परिजन नई दिल्ली स्टेशन स्टेशन रवाना हुए, वहीं उसके पड़ोसी दीप्ति के घर के बाहर एकत्र हो गए। (सभी फोटो: मनीकान्त शर्मा/अमर उजाला, गाजियाबाद)
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अपहरणकर्ता दीप्ति से बोल रहे थे, चुपचाप चलो किसी से मिलवाना है

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करीब दस बजे दीप्ति को परिजन घर लेकर पहुंचे तो मीडियाकर्मियों ने उससे बात करने की कोशिश की, मगर परिजन पिछले दरवाजे से उसे आनन-फानन में अंदर ले गए और मीडिया से मिलने से साफ इंकार कर दिया। देर शाम सिर्फ अमर उजाला से दीप्ति और उसके परिजनों ने बात करते हुए अपहरण के इन 36 घंटों का दर्द बयां किया।
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वह ऑटो में वैशाली मेट्रो स्टेशन से बस अड्डे के लिए बैठी थी। मोहन नगर पर ऑटो खराब हो गया। दूसरे ऑटो को रुकवाकर उसमें बैठ गई। उसके साथ दो युवक भी इस आटो में बैठ गए। इसमें पहले से ही एक युवती, युवक और चालक थे। हिंडन पुल पार करते ही ऑटो राजनगर एक्सटेंशन की तरफ मुड़ा तो उसने विरोध किया। इस पर ऑटो सवार युवकों ने चाकू निकाल लिया।

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दूसरी युवती तो ऑटो से कूद गई, मगर वह नहीं कूद सकी। इसके बाद बदमाशों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी और हाथ-पैर भी बांध दिए। उसका मोबाइल और लैपटॉप भी अपहरणकर्ताओं ने छीन लिया। करीब 15 मिनट चलने के बाद यह ऑटो भी खराब हो गया। इसके बाद युवकों ने फोन पर किसी से बात की। करीब आधा घंटे बाद अपहरणकर्ताओं ने उसे कार में डाल लिया।
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इस दौरान आधे घंटे तक उसे किसी कमरे में रखा गया था। कार करीब 3 घंटे चली। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने उसे गन्ने के खेत में रखा। करीब 10 किलोमीटर उसे पैदल भी चलवाया। पैदल चलने केदौरान उसे अहसास हुआ कि यह शायद नदी का किनारा था, क्योंकि यहां बालू रेत था। इस दौरान उसे नदी भी पार कराई गई। अपहरणकर्ताओं ने उसे सेब और चिप्स भी खाने को दिए। अपहरणकर्ताओं के पास मोबाइल थे, मगर वह उसके सामने बात नहीं करते थे। उससे अलग जाकर ही वह फोन करते थे।
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एक अपहरणकर्ता का यह भी कहना था कि वह घबराए नहीं, उसे कुछ नहीं कहा जाएगा। किसी के कहने पर उसे उठाया गया है। तुम्हें उससे बस मिलवाना है। रात बीतने पर भी जब कोई नहीं आया तो अपहरणकर्ता उसे एक छोटे से स्टेशन पर लेकर पहुंचे। यहां दिल्ली जाने वाली ट्रेन में उसे बिना टिकट बैठा दिया और 100 रुपये भी दिए। अपहरणकर्ताओं का कहना था कि जिससे तुम्हें मिलवाना था, वह नहीं आया। नरेला स्टेशन आया तो तब तक उजाला हो चुका था। तभी एक यात्री से मोबाइल लेकर उसने अपने पिता को फोन किया और अपने सकुशल होने की जानकारी दी।
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परिजनों को जब दीप्ति मिली तो पुलिस उनके साथ नहीं थी, नईऱ् दिल्ली से वापस लौटते वक्त दीप्ति और उसके परिजनों को महाराजपुर चौकी पर रोका गया। वहां पर एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने दीप्ति और उसके परिजनों से बात की। दीप्ति ने बताया कि बदमाशों ने उसके साथ ज्यादती नहीं की, उसे सकुशल छोड़ दिया। दीप्ति की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए चौकी पर उससे ज्यादा पूछताछ नहीं की गई। परिजन उसे घर ले आए।

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एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि दीप्ति सकुशल है। शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं। एसएसपी ने कहा कि उन्होंने दीप्ति से पूछताछ नहीं की, बल्कि उससे मामले की जानकारी ली। जो कुछ दीप्ति ने बताया है, उसकी जांच की जा रही है। बदमाशों की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगी हैं। दीप्ति के बताए गए कईऱ् तथ्यों की कड़ियों को जोड़ना जरूरी है। जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया जाएगा। दीप्ति के बयानों के आधार पर पुलिस इसे अपहरण का ही मामला मान रही है।

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दीप्ति के सकुशल बरामदगी के बाद उसके माता-पिता मीडिया से रूबरू हुए। दोनों ने कहा कि ‘हमारी बेटी सकुशल मिल गई है, पुलिस और मीडिया का इसके लिए शुक्रिया।’ परिजनों ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में तेजी से काम किया, दो सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी बेटी की तलाश में जुटे रहे। मीडिया ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर दबाव बनाया, परिणामस्वरूप उनकी बेटी घर वापस लौट आई है।

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बुधवार रात दीप्ति के अपहरण के बाद शहर में संदिग्ध वाहनों खासतौर पर ऑटो वालों की तलाश में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया था। बावजूद इसके पुलिस को वह ऑटो चालक नहीं मिला। राजनगर एक्सटेंशन में पुलिस की टीमें गई थीं। बदमाश दीप्ति को कार में डालकर शहर से बाहर ले गए, सिर्फ गाजियाबाद ही नहीं वह दिल्ली पुलिस को भी चकमा देकर हरियाणा पहुंच गए। गाजियाबाद पुलिस दीप्ति को ट्र्रेस भी नहीं कर सकी थी। सुबह खुद दीप्ति ने कॉल कर परिजनों को जानकारी दी।

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दीप्ति के मिलने के बाद चर्चा है कि उसे बदमाशों ने अपहरण नहीं किया बल्कि वह एक पार्टी में जाना चाहती थी। परिजन इससे खफा थे। परिजनों ने पार्टी में जाने की अनुमति नहीं दी। हालांकि पुलिस और परिजन दोनों ने इसे अफवाह बताया है।

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रहस्यमयी ढंग से 36 घंटे बाद घर लौटी दीप्ति से मिलने स्नैपडील के मालिक कुनाल बहल उसके घर कविनगर पहुंचे। मीडिया से बचते हुए कुनाल करीब 12:30 बजे दीप्ति के मकान में पिछले दरवाजे से दाखिल हुए। दीप्ति की कंपनी में ही काम करने वाली उसकी कई साथी भी उसके घर पहुंची।

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करीब दो घंटे तक कुनाल बहल ने परिजनों और दीप्ति से बातचीत की। कुनाल ने मीडिया से तो बात नहीं की, लेकिन परिजनों ने बताया कि उन्होंने दीप्ति को ढांढस बंधाया और ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले कुछ दिन आराम करने के लिए कहा। कुनाल ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी नौकरी पर कोई संकट नहीं है, वह सुरक्षित है।

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दीप्ति के साथ हुई घटना में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे हस्तक्षेप किया। दीप्ति बरामदगी के बाद सीएम ने जिला प्रशासन को उसके घर की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। डीएम ने नगर निगम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। नगर निगम ने दीप्ति के घर की दोनों एंट्री प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए और चारों ओर नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई।

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सीसीटीवी फुटेज के लिए दीप्ति के घर डीवीआर सेटअप भी लगाया है। इन सीसीटीवी कैमरों के जरिए कंप्यूटर और मोबाइल से भी निगरानी की जा सकेगी। शहर में सुरक्षा के लिहाज से लगवाए गए कैमरे ठप हैं। ये कैमरे चालू होते तो अपहरण की रात ही पुलिस को अहम सुराग मिल सकते थे। परिजनों के मुताबिक दीप्ति एक ऑटो खराब हो जाने पर मोहननगर से दूसरे ऑटो में सवार हुई थी। मोहननगर चौराहे पर कई कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन सभी बंद हैं।

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दीप्ति का एक पूर्व दोस्त पुलिस की रडार पर है। पुलिस को शक है कि कहीं इस अपहरणकांड के  पीछे उसका हाथ तो नहीं है। वह पुलिस की रडार पर है, जल्द ही इस मामले में पुलिस उससे गहनता से पूछताछ कर सकती है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं। पुलिस ने कहा तो परिजन वह दीप्ति को लेकर एमएमजी अस्पताल मेडिकल परीक्षण कराने गए। हालांकि वहां दीप्ति ने परीक्षण कराने से इंकार कर दिया। सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि दीप्ति का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, लेकिन उन्होंने मेडिकल कराने से इनकार कर दिया।

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पुलिस सूत्रों ने बताया कि जिस वक्त एसएसपी ने दीप्ति से उसके घर जाकर पूछताछ की तो उसने कहा कि बदमाशों को मत पकड़ना। दीप्ति का दावा है कि एक बदमाश ने उसकी चप्पल कीचड़ में सन जाने के बाद खुद साफ की। बदमाशों ने अपनी पिस्टल तक दीप्ति को रखने के लिए दे दी थी। उस वक्त एसएसपी, एसपी सिटी दीप्ति से पूछताछ कर रहे थे, परिजनों ने यह बात कही और मेयर प्रत्याशी से मिलने घर से बाहर नहीं आए। दीप्ति और उसके परिजनों से बातचीत किए बिना ही मेयर प्रत्याशी वापस घर लौट आए।
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दीप्ति की सकुशल बरामदगी पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर गाजियाबाद पुलिस को बधाई दी है। दीप्ति के अपहरण के बाद उसकी तलाश के लिए मुख्यमंत्री ने ही ट्वीट कर एसएसपी गाजियाबाद को सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए कहा था। दीप्ति के अपहरण के बाद जितनी गाजियाबाद पुलिस की किरकिरी हो रही थी, उसकी बरामदगी के बाद तारीफ भी उतनी ही मिली। शुक्रवार को गाजियाबाद पुलिस सोशल साइट्स पर छाई रही। फेसबुक, व्हाटस-एप और ट्वीटर पर गाजियाबाद पुलिस की सराहना की गई। गाजियाबाद ही नहीं दूसरे राज्यों से भी गाजियाबाद पुलिस को बधाई मिली।
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