मेट्रो किराया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कहा है कि अगर केंद्र हामी भरे तो वह जनहित में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) का अधिग्रहण करने को तैयार हैं। दिल्ली सरकार अपने हिस्से का 1500 करोड़ देगी पर पांच माह में दोबारा किराया बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं है।
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केजरीवाल ने पुरी के पत्र में लिखे उस आंकड़े पर सवाल उठाए हैं जिसमें बताया गया था कि किराया 91 फीसदी तक बढ़ा है। केजरीवाल ने किराये के सभी स्लैब का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकतम किराया 117 फीसदी तक बढ़ा है। आपका सुझाव है कि किराया घटाने पर दिल्ली सरकार को 3000 करोड़ रुपये की भरपाई करनी होगी। दिल्ली सरकार इसके लिए तैयार है। अगर कोलकाता मेट्रो 100 फीसदी भरपाई कर सकती है तो दिल्ली सरकार अपने हिस्से का 1500 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है। क्योंकि दिल्ली मेट्रो में केंद्र और दिल्ली सरकार 50-50 फीसदी की भागीदार है।
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केजरीवाल ने आगे लिखा है कि मैं इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि केंद्र डीएमआरसी की धारा 86 के तहत निर्देश जारी नहीं कर सकती है। इस धारा के मुताबिक, अगर मेट्रो रेलवे प्रशासन कुछ गड़बड़ कर रहा है तो केंद्र सरकार के पास उसमें हस्तक्षेप करने और जवाब-तलब करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब खुद डीएमआरसी को एफएफसी (किराया निर्धारण समिति) की सिफारिशें आठ सितंबर 2016 को मिल गई थी तो उसे लागू करने में आठ महीने की देरी क्यों की। अगर वह ऐसा कर सकती है तो फिर किराया बढ़ाने में एक साल का अंतर क्यों नहीं दे सकती है।
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अरविंद केजरीवाल
उन्होंने अंत में लिखा है कि 10 अक्तूबर से हो रहे किराया बढ़ोतरी को रोका जाए। इस बीच केंद्र और दिल्ली सरकार के डीएमआरसी बोर्ड के सदस्य बैठकर मेट्रो किराया संरचना की समीक्षा करें। हम पहले ही अपने सभी नामित बोर्ड सदस्यों की आपात बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं।