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जेएनयू हिंसा मामला में चौंकाने वाला खुलासा, आरोपियों को पता था कि किस कमरे में कौन रहता है

Fri, 10 Jan 2020 09:32 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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jnu violence - फोटो : ANI
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार को हुई हिंसा की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के प्रमुख डॉ. जॉय टिर्की ने बताया कि हिंसा के दौरान पेरियार, साबरमती व नर्मदा हॉस्टल में तोड़फोड़ की गई। इन छात्रावासों में कुछ खास कमरे में ही तोड़फोड़ की गई और छात्रों को निशाना बनाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपियों को पता था कि किस कमरे में कौन रहता है। डॉ. टिर्की ने कहा कि बाहरी व्यक्ति के लिए जेएनयू कैंपस से पूरी तरह वाकिफ होना संभव नहीं है। हिंसा में शामिल नकाबपोशों के संबंध में उन्होंने कहा कि अभी जांच चल रही है।  
 
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Joy Tirkey - फोटो : अमर उजाला
डीसीपी डॉ. जॉय टिर्की ने तीन से पांच जनवरी तक की घटनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि जेएनयू में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन चल रहा था। यह रजिस्ट्रेशन छह महीने के लिए होता है और शुल्क 300 रुपये हैं। चार छात्र संगठन एआईएसए, एआईएफएफ, एसएफआई और डीएसएफ रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे थे। ये छात्र संगठन 28 अक्तूबर, 2018 से विरोध कर रहे हैं। कुछ छात्र रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे, जबकि ये छात्र संगठन रजिस्ट्रेशन नहीं करने दे रहे थे। तीन जनवरी को दोपहर एक बजे जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों समेत अन्य छात्र सर्वर रूम में घुस गए। उन्होंने सर्वर रूम तोड़ दिया और स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की की। इससे रजिस्ट्रेशन बंद हो गया था। जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर वसंतकुंज थाने में एफआईआर (नंबर-3) दर्ज की गई। इनमें आठ छात्रों को आरोपी बनाया गया था। दो घंटे में सर्वर को ठीक कर दिया गया।
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आईशी घोष - फोटो : अमर उजाला
चार जनवरी को फिर कुछ छात्र रजिस्ट्रेशन करना चाहते थे। इस वजह से जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारी समेत चार संगठनों के नेता परेशान थे। इन लोगों ने फिर सर्वर रूम का गेट तोड़ दिया। सिक्योरिटी स्टाफ के साथ मारपीट की। इस मामले में भी वसंतकुंज नार्थ थाने में एफआईआर (नंबर-चार) दर्ज की गई थी। इसके बाद पांच जनवरी को सुबह साढ़े ग्यारह बजे चार छात्र रजिस्ट्रेशन करना चाहते थे। ये छात्र रजिस्ट्रेशन कराने के लिए स्कूल ऑफ सोशल साइंस के सामने बैठे थे। इसी दौरान छात्रों के एक ग्रुप ने रजिस्ट्रेशन के इंतजार में बैठे छात्रों के साथ मारपीट की। बीचबचाव में सिक्योरिटी स्टाफ को भी चोटें आईं।

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jnu violence - फोटो : अमर उजाला
हमलावरों में आईशी घोष शामिल थी
पांच जनवरी को शाम करीब पौने चार बजे पेरियार हॉस्टल में कुछ नकाबपोश लोगों ने हमला कर दिया। हमलावरों में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष भी शामिल थीं। इनमें कुछ छात्रों को चोटें आई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा था। कैंपस में सादी पोशाक में पुलिसकर्मी तैनात थे। डॉ. टिर्की ने बताया कि पेरियार हॉस्टल में कुछ खास कमरों को ही टारगेट किया गया था।
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jnu violence - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद करीब 130-150 छात्र व शिक्षक साबरमती हॉस्टल टी प्वाइंट पर शांतिपूर्ण बैठक कर रहे थे। यहां पर नकाबपोशों ने हमला कर दिया। हमलावरों के हाथों में पत्थर, डंडा व रॉड थे। यहां पर आईशी घोष भी थी। साबरमती में भी शाम सात बजे कुछ खास कमरों में ही तोड़फोड़ और मारपीट की गई। नर्मदा में भी तोड़फोड़ की गई थी। इस बाबत वसंतकुंज थाने में एफआईआर नंबर-6 दर्ज की गई थी।
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Dr. Joy Tirkey - फोटो : अमर उजाला
60 अफसरों की टीम मामले की कर रही है जांच
डॉ. जॉय टिर्की ने बताया कि एसआईटी में तीन एसीपी समेत 60 अफसर शामिल हैं। पुलिस कैंपस में सभी से बात कर रही है। रजिस्ट्रेशन को खंगाला जा रहा है। तकनीकी रूप से जांच की जा रही है।
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Joy Tirkey - फोटो : अमर उजाला
हिंसा के समय कुछ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे
डीसीपी डॉ. टिर्की ने बताया कि जेएनयू में कई व्हाट्सएप ग्रुप पहले से बने हुए हैं। मगर कुछ ग्रुप कैंपस में हिंसा के समय बनाए गए थे। पुलिस इसकी जांच कर आरोपियों की पहचान कर रही है।
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मनदीप सिंह रंधावा - फोटो : अमर उजाला
छात्रों की वजह से आम लोग परेशान : रंधावा
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मनदीप सिंह रंधावा ने बताया कि छात्रों के प्रदर्शन की वजह से आम जनता को परेशानी हो रही है। बृहस्पतिवार को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के वजह से भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। छात्र कानून का उल्लंघन करते हैं। पुलिस ने कनॉट प्लेस थाने में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 
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