कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस कुछ सबूत जुटाने का दावा कर रही है। इन्हीं सबूतों की बुनियाद पर ये चार्ज़शीट दायर की गई है। पुलिस जिन सबूतों का दावा कर रही है, उसके मुताबिक-
- प्रत्यक्षदर्शियों ने कन्हैया कुमार को जेएनयू में आयोजित एक 'अवैध सभा' में देशविरोधी नारे लगाते हुए देखा।
- एक निजी समाचार चैनल से मिले 30 मिनट की फुटेज से इसकी तस्दीक होती है कि कन्हैया वहां मौजूद थे।
- वो सभा गैरकानूनी थी क्योंकि जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी से इसकी आधिकारिक इजाजत नहीं ली गई थी।
- मुख्य आयोजक उमर खालिद और अनिर्बान ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के बहाने इसकी इजाजत ली थी जो बाद में राष्ट्रविरोधी गतिविधि में बदल गई। ये सोची समझी सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
- सभा में देशविरोधी नारे लगाए जा रहे थे जिससे सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए अन्य छात्रों को भी उकसाया गया।
- जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी और अन्य सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि सभा में 15 से 20 छात्र मौजूद थे जो राष्ट्रविरोधी नारे लगा रहे थे और कन्हैया कुमार इस सभा की अगुवाई कर रहे नेताओं में से एक थे।
- पुलिस के इन आरोपों का पता बीबीसी को चार्जशीट के कुछ पन्नों से हुआ है, करीब 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है।
कन्हैया उमर अनिर्बन के खिलाफ पुलिस ने दायर की चार्जशीट
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की अपील की है। हालांकि आरोप पत्र में कुल 36 लोगों के नाम हैं, लेकिन बाकी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही गई है।
कोर्ट चाहे तो उन्हें समन भेज सकता है। आरोप पत्र के साथ कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फुटेज और अन्य दस्तावेजों को बतौर सबूत पेश किया गया है।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता और जेएनयू छात्रसंघ नेता शहला राशिद का नाम भी शामिल किया गया है। इसके अलावा जेएनयू प्रशासन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों, सुरक्षाकर्मियों समेत कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है।
सवाल जिनके जवाब नहीं...
बीबीसी से बातचीत में कन्हैया कुमार ने चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार इलेक्शन मोड में है। नेशनल से लेकर एंटीनेशनल जैसी हर चीज आजमाई जा रही है। नौ फरवरी, 2016 की इस घटना के तीन साल बाद दायर की गई इस चार्जशीट की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के एक दूसरे के लगातार संपर्क में थे और उनके मोबाइल फोन का लोकेशन जेएनयू था। उमर खालिद ने मैसेज पर कन्हैया कुमार को जेएनयू के साबरमती ढाबे पर आने के लिए कहा। इन बातों से राजद्रोह के आरोप कैसे मजबूत हो जाते हैं?
नामजद गवाहों के बयानों और वीडियो फुटेज के हवाले से ये ज़रूर कहा गया है कि कन्हैया कुमार उस सभा में मौजूद थे लेकिन वे किस तरह से सभा की अगुवाई कर रहे थे या फिर वे किस तरह के राष्ट्रविरोधी बयान या नारे लगा रहे थे, इस पर रोशनी नहीं डाली गई है। कन्हैया इस सभा के आयोजक नहीं थे। ये बात खुद पुलिस ने मानी है लेकिन घटना में उनकी किस तरह की भूमिका थी, इस बारे में तस्वीर ज्यादा साफ नहीं है।
दिल्ली के वसंतकुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज़ एफ़आईआर नंबर 110/2016 के मामले में दायर चार्जशीट में जेएनयू के सुरक्षाकर्मियों के अलावा एबीवीपी के छात्र नेताओं की गवाहियां दर्ज हैं। सबूतों के नाम पर इनके अलावा ईमेल, एसएमएस और वीडियो फुटेज का हवाला भी दिया गया है।
चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है, "जेएनयू की उस शाम अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम से पहले उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य 'भारत के कब्जे' से 'कश्मीर की आजादी' पर ईमेल के जरिए बात कर रहे थे। वे कानून के द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा फैलाने की कोशिश कर रहे थे। भारत तेरे टुकड़े होंगे... और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, जंग रहेगी जैसे नारे लगने से उनके इरादों का साफ पता चलता है।"
पुलिस के ये दावे वीडियो फुटेज के हवाले से किए गए हैं लेकिन कन्हैया कुमार क्या नारे लगा रहे थे, इस बारे में अभी तक किसी ठोस वीडियो सबूत की बात अभी तक सामने नहीं आई है। खुद कन्हैया कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "सबूत की सच्चाई ये है कि जिस वीडियो के सही होने की बात कही जा रही है, उसी वीडियो को जेएनयू की हाई लेवल कमेटी ने भी सही होने का दावा किया था। लेकिन जेएनयू की हाई लेवल कमेटी ने एक भी ऐसा वीडियो पेश नहीं किया जिसमें जेएनयू का कोई विद्यार्थी देश के खिलाफ कोई नारा लगा रहा हो।"
आखिरी फैसला
अब वापस लौटते हैं उसी शुरुआती सवाल पर कि राजद्रोह के आरोप में आख़िरी बार किस अपराधी को कसूरवार ठहराया गया था? इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से 2016 के बीच राजद्रोह के आरोप में 179 लोग गिरफ्तार किए गए लेकिन सजा केवल दो लोगों को हुई। कन्हैया कुमार के केस की चार्जशीट में पुलिस ने जिन सबूतों की बुनियाद पर मुक़दमे की नींव रखी है, उसके बारे में आखिरी फैसला अदालतें ही करेंगी। और इस मुकदमे को अभी अदालत की कई तारीखों से गुजरना है।