सुनपेड़ कांड के पीड़ित जितेंद्र को 43 घंटे बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच उसे अस्पताल से गांव पहुंचाया गया। (फोटो और स्टोरी: गौरव चौधरी और राहुल श्याम/अमर उजाला, फरीदाबाद)
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जितेंद्र के अस्पताल से निकलते ही सुनपेड़ में अफवाहों का दौर शुरु
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जितेंद्र को किसी रणनीति के तहत अस्पताल में भर्ती कराया गया था या फिर वाकई उसे इलाज की जरूरत थी, इसे लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
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हालांकि, जितेंद्र को गांव से अलग कर दो दिन तक माहौल को शांत बनाए रखने में पुलिस कामयाब रही, लेकिन उसके गांव पहुंचते ही फिर राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलने लगा है।
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बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। इसी दिन शाम साढ़े छह बजे अचानक जितेंद्र को सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
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उसे अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। वहां पुलिस का कड़ा पहरा था। जितेंद्र से मिलने की इजाजत परिवार के लोगों को भी नहीं थी।
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हालांकि, उसे अस्पताल में भर्ती कराए जाने का कारण बर्न इंजरी में इन्फेक्शन फैलने के खतरे को बताया जा रहा था, लेकिन अस्पताल से जब छुट्टी दी गई तो हाथों पर पट्टी नहीं बंधी थी।
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कुछ सूत्रों का कहना है कि 20 अक्तूबर के बाद गांव में चले सियासी खेल से मचे हंगामे को शांत करने के लिए सोची-समझी योजना के तहत उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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इसका असर यह हुआ कि शनिवार दोपहर तक गांव का माहौल शांत रहा, लेकिन जितेंद्र के वापस गांव पहुंचते ही एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
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जितेंद्र की अस्पताल से छुट्टी किसी दबाव के तहत हुई, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
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पीड़ित पक्ष के लोग उसे गांव वापस ले जाने को बेहद उत्सुकत दिखा रहे थे।