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Janmashtami : धूमधाम से मनाई गई जन्माष्टमी, लक्ष्मी नारायण मंदिर व इस्कॉन में श्रद्धालुओं की रही भारी भीड़

Fri, 19 Aug 2022 10:12 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में भीड़ - फोटो : शुभम बंसल
राजधानी में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरी श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। पूरा दिन मंदिर नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, यसोदा नंदन की जय, माखन चोर की जय, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की, बोलो बांके बिहारी लाल की आदि जयघोष से गूंजते रहे। मंदिरों में सजी झांकियों, नृत्य व भजन मंडलियों ने माहौल को पूरी तरह से श्रीकृष्णमय बनाए रखा। रात 12 बजते ही मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठे। इस दौरान मंदिरों में अभिषेक करने के बीच विशेष आरती की गई और 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर की ओर देखती छोटी श्रद्धालु - फोटो : शुभम बंसल
राजधानी के तमाम छोटे-बड़े मंदिरों में सुबह पांच बजे पहली आरती के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की शुरुआत हुई। सुबह की आरती में हर भक्त झूम रहा था। इसके बाद पूजा अर्चना और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने का सिलसिला शुरू हुआ और आधी रात तक जारी रहा। लक्ष्मी नारायण मंदिर में सबसे अधिक श्रद्धालु पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे। इस्कॉन टैंपल (ईस्ट ऑफ कैलाश, पंजाबी बाग, रोहिणी, द्वारका व गीता कालोनी) में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इन मंदिरों में विदेशी श्रद्धालुओं ने भी पूजा अर्चना की, वहीं भगवान श्रीकृष्ण का जयघोष गूंजता रहा। भगवान श्रीकृष्ण को झूला झूलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। बच्चे भी झूला झूलाने में पीछे नहीं रहे। बहुत से छोटे बच्चे भगवान श्रीकृष्ण बने हुए थे। सभी मंदिरों पर रंगबिरंगी रोशनी की गई थी और मंदिर फूलों की सुगंध से सराबोर थे। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई गई।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सजा मंदिर - फोटो : शुभम बंसल
छतरपुर मंदिर एवं बद्री भगत झंडेवाला मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इसी तरह आसफ अली रोड स्थित श्रीराम हनुमान वाटिका मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही निराले अंदाज में मनाया गया। यहां अनेक झांकिया बनाई गई थी, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से रूबरू कराया गया।

श्रीकृष्ण के साथ भक्तों ने किया जमकर नृत्य

लक्ष्मी नारायण मंदिर में दिनभर कीर्तन का आयोजन हुआ। इस दौरान श्रीकृष्ण बने बच्चों के साथ भक्तों ने जमकर नृत्य किया। उनका नृत्य इतना मनमोहक था कि उसे देखने के लिए यहां लाइन में लगे भक्त कुछ पल के लिए स्वयं को रोकने को मजबूर हो गए। राधा कृष्ण बने बच्चों ने मंदिर में जमकर धमाल किया। वह श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : शुभम बंसल

सभी इस्कॉन मंदिरों में सोने के कलश से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक

सभी इस्कॉन मंदिरों में भक्तों के लिए भगवान के अभिषेक के भी खास इंतजाम किए। मंदिरों में सोने के कलश से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, दूध, दही और जल से किया गया। इसके अलावा मंदिरों में पूरा दिन हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन हुआ। इस मौके पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इस्कॉन गुरुकुल के बच्चों ने राधा कृष्ण बनकर खास प्रस्तुति दी। वहीं सैकड़ों की संख्या में बच्चों ने राधा कृष्ण बनकर भक्ति का समां बांधा।

झांकियां भी रहीं आकर्षण का केंद्र

मंदिरों में विशेषकर लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीकृष्ण भगवान की आकर्षक झांकियां सजाई गई, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूप, वासुदेव व देवकी के जेल में बंद होना, जेल से बालक श्रीकृष्ण को यमुनापार ले जाते हुए वासुदेव, पूतना का वध करते श्रीकृष्ण, यशोदा को अपने मुख में ब्राह्माण्ड दिखाते हुए श्रीकृष्ण, माखन चोरी करते हुए नरसिंह अवतार आदि झांकियां थी। यह झांकिया श्रद्धालुओं के आर्कषण का केंद्र बनी हुई थी। वहीं झंडेवालन मंदिर में चारों धाम की झांकिया बनाई गई, जिनके दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं ने काफी रूचि ली। जबकि इस्कॉन मंदिरों में भगवान की विभिन्न मुद्राओं की तस्वीर लगाई गई।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में नृत्य करते श्रद्धालु - फोटो : शुभम बंसल

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर आध्यात्म और कला का अनूठा प्रदर्शन

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने द्वारका में मनाए गए जन्माष्टमी समारोह के दौरान श्रीकृष्ण भगवान के जीवन की लीलाओं के आध्यत्मिक रहस्यों को कला के माध्यम से लोगों के बीच रखा। कार्यक्रम में देश विदेश से आए 250 कलाकारों ने श्रीकृष्ण-सुदामा प्रेम, मीरबाई की अटूट भक्ति और कालिया मर्दन जैसे प्रसंगों पर नृत्य नाटिकाओं का मंचन किया। साथ ही संस्थान के युवा प्रचारकों ने श्रीकृष्ण लीलाओं का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्ष सबके सामने रखा। इस मौके पर साध्वी परमा भारती ने भगवन कृष्ण की तुलना मैनेजमेंट गुरु से करते हुए कहा कि उन्होंने जिस तरह महाभारत के युद्ध में भूमिका निभाई वो किसी मैनेजमेंट गुरु से कम नहीं थी। हर पात्र को केवल उतना ही कार्य करने दिया जितना उनकी योजना के हिसाब से जरूरी था।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : शुभम बंसल

कान्हा को लगा 1156 व्यंजनों का भोग

जीटी करनाल रोड पर स्थित खाटू श्याम धाम मंदिर में कान्हा को 1156 व्यंजनों का भोग लगाया। यहां सुबह से लेकर आधी रात भक्त दर्शन करने के आए। इस दौरान भंडारा, पानी की सुविधा व सभी को खाटू श्याम का प्रसाद दिया गया। वहीं बच्चों ने कृष्ण और राधा के रूप नृत्य नाटिका व कृष्ण की जीवन लीला की प्रस्तुति की।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नृत्य करते श्रद्धालु - फोटो : शुभम बंसल

प्रसाद की भी जांच की गई

राजधानी के विख्यात लक्ष्मी नारायण मंदिर और पांचों इस्कॉन मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। मंदिरों के मुख्य द्वार पर ही नहीं, बल्कि मंदिरों के आसपास भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं को कड़ी जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया। उन्होंने प्रसाद की भी जांच की और मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत नहीं दी। इस कारण श्रद्धालुओं को कुछ दिक्कत हुई।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नृत्य करते श्रद्धालु - फोटो : शुभम बंसल

कोरोना की रोकथाम के भी इंतजाम किए

विख्यात मंदिरों में कोरोना की रोकथाम के भी इंतजाम किए गए थे। मंदिरों में श्रद्धालुओं से मास्क लगाने की अपील की गई। इसके अलावा लाइन में भी दूरी रखने का आग्रह किया गया। मंदिरों के गेट पर श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज कराया गया।
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