मेट्रो ट्रैक पर बना स्क्रीन डोर
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सभी लाइन पर नहीं लग पाए हैं स्क्रीन डोर
प्रबंधन ने मेट्रो ट्रैक को आत्महत्या का ट्रैक बनने से रोकने के लिए एयरपोर्ट मेट्रो लाइन की तर्ज पर विभिन्न लाइनों पर स्क्रीन डोर लगाने की पहल 2016 में की थी। हुडा सिटी सेंटर से जहांगीरपुरी के बीच चलने वाली येलो लाइन पर अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर स्क्रीन डोर लगाए गए थे। इनका मकसद यात्रियों को सुरक्षित सफर देना और तनाव से परेशान यात्रियों का जीवन बचाना था। अब भी ब्लू लाइन, येलो, ग्रीन, वायलट व रेड लाइन के अधिकतर स्टेशनों पर स्क्रीन डोर नहीं लग पाए हैं। स्क्रीन डोर से ट्रैक और प्लेटफार्म के बीच एक कांच की दीवार रहती है। ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकने के बाद स्क्रीन डोर खुलता है। इसके आगे मेट्रो ट्रेन का दरवाजा होता है। इससे कोई भी यात्री ट्रैक के संपर्क में सीधे नहीं आ पाता।