बरेली शहर से उठाए गए इनामुल हक से लखनऊ में एटीएस की पूछताछ में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एटीएस के सूत्र दावा कर रहे हैं कि इनामुल हक अलकायदा के संगठन अंसार गजवत उल हिंद की खुराफाती सोच से प्रभावित शख्स है और इस जेहादी संगठन के लिए बतौर स्लीपिंग मॉड्यूल्स काम कर रहा था। वह आतंकी प्रशिक्षण लेने के लिए जल्द ही पीओके जाने वाला था।
विज्ञापन
2 of 7
Inamul haq
- फोटो : अमर उजाला।
कटघर के रहने वाले इनामुल हक को रिमांड पर लेकर एटीएस पूरे जेहादी नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि इनामुल सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहता था। फेसबुक, इंस्ट्राग्राम के जरिए पूरे देश में तमाम लोगों से जुड़ा था।
विज्ञापन
3 of 7
Inamul haq
- फोटो : अमर उजाला।
जम्मू कश्मीर, केरल, कर्नाटक के युवाओं से उसका ज्यादा संवाद होता था। हालांकि मोबाइल से बातचीत का कोई खास रिकॉर्ड नहीं मिला है। जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी ज्यादातर बातचीत इंटरनेट या व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिये होती थी जिसका रिकॉर्ड मिलना संभव नहीं है।
4 of 7
inamul haq
- फोटो : अमर उजाला।
इमानुल हक ने अपना नाम अबू मोहम्मद अल हिंदी रख लिया था और वह इसी नाम से फेसबुक पर आईडी बनाकर अपने संदेश लोगों को भेज रहा था। सूत्र बताते हैं कि ऐसा उसने जाकिर मूसा और उसके संगठन अंसार गजवत उल हिंद संगठन की विचारधारा से प्रेरित होकर किया था और फेसबुक प्रोफाइल पर अलकायदा का झंडा भी लगा रखा था।
विज्ञापन
5 of 7
inamul haq
- फोटो : अमर उजाला।
सूत्र बताते हैं कि वह जल्दी ही पाक अधिकृत कश्मीर जाने वाला था। वहां उसे 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाना था। इसके बाद वह सक्रिय रूप से आतंकवादी मिशन में शामिल हो जाता।
विज्ञापन
6 of 7
Inamul haq
- फोटो : amar ujala
ललहारी के बाद संगठन के खात्मे का दावा
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में अंसार गजवत उल हिंद का कमांडर अब्दुल हमीद ललहारी उर्फ हारुन अब्बास मारा जा चुका है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया था कि इस आतंकी संगठन का उनके प्रदेश से सफाया हो चुका है। इससे पहले संगठन के सदर जाकिर मूसा को मुठभेड़ में मार दिया गया था जिसके बाद ललहारी को चीफ बनाया गया था।
इनामुल हक आतंकी जाकिर मूसा का बड़ा फॉलोअर है और उसे शहीद भाई बोलता है। जम्मू कश्मीर पुलिस के दावे से इतर माना जा रहा कि संगठन अभी जीवित है और नए लोग उसकी विचारधारा का प्रसार कर रहे हैं। संगठन को पाकिस्तान से आर्थिक मदद मिलती रही है।