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आरुषि हत्याकांड : इस तरह मीडिया ने बिना ट्रायल के तलवार दंपति को ठहराया था दोषी

Thu, 12 Oct 2017 06:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद हाई प्रोफाइल मामलों में मीडिया खासकर खबरिया चैनलों की पक्षपातपूर्ण भूमिका फिर से चर्चा में है। मई, 2008 में इस हत्याकांड के सामने आने के बाद से ही मीडिया ने आरुषि के चरित्र पर उंगली उठाने से लेकर उसके माता-पिता यानी तलवार दंपति के विवाहेतर संबंधों तक के बारे में अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों के आधार पर खबरें दिखाकर आम जनता से लेकर जांच एजेंसी और न्यायपालिका तक को प्रभावित करने की कोशिश की। इस हत्याकांड के सात साल बाद 2015 में जब तलवार दंपति को अपनी ही बेटी और नौकर के खून के इल्जाम में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तो इसमें मीडिया ट्रायल की अहम भूमिका रही।
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arushi murder case
कानून के शासन में यकीन करने वाले हर व्यक्ति के लिए इस मामले में की गई अनैतिक रिपोर्टिंग के कारण चिंतित होना स्वाभाविक था। चूंकि सारे खबरिया चैनलों के मुख्यालय नोएडा में ही थे, इसलिए उन्होंने इस केस की कवरेज के लिए अपने सारे संसाधन झोंक दिए।
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माता-पिता के साथ आरुषि
मीडिया रिपोर्टिंग की नैतिकता के पाठ के कोसों दूर रहने वाले रिपोर्टरों ने अपने-अपने बॉस को खुश करने के लिए इस मामले की बढ़-चढ़कर रिपोर्टिंग की, जो तथ्यों पर आधारित न होकर अफवाहों पर केंद्रित थी। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में जब 2013 में तलवार दंपति की एक याचिका खारिज हो गई तो मीडिया ने इसे ऐसे पेश किया जैसे आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर न्यायपालिका को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे थे। जबकि वास्तविकता यह थी कि शीर्ष अदालत ने इस मामले में तलवार दंपति को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का आदेश दिया था। तलवार दंपति ने अतिरिक्त गवाहों को समन जारी करने का अनुरोध किया था।

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arushi talwar - फोटो : अमर उजाला
हाई प्रोफाइल मामलों में मीडिया ट्रायल की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी। 6 अगस्त, 2008 को गाजियाबाद पीएफ घोटाले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीएन अग्रवाल, जस्टिस वीएस सिरपुरकर और जस्टिस जीएस सिंघवी की खंडपीठ ने आरुषि-हेमराज मर्डर केस के संदर्भ में सुपर जांच एजेंसी की भूमिका निभाने के लिए मीडिया की जमकर आलोचना की थी। जस्टिस सिंघवी के शब्दों में, ‘मीडिया ने इस मामले में सुपर जांच एजेंसी की तरह काम किया है। नतीजतन, अपनी इकलौती बेटी को खोने वाले तलवार दंपति की प्रतिष्ठा को ऐसी क्षति पहुंची जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। लोकतंत्र में यह स्थिति अकल्पनीय है।’
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arushi talwar
इस हत्याकांड में मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस अग्रवाल ने कहा था, ‘हम इस बात से चिंतित नहीं हैं कि मीडिया क्या कह रहा है। वे हमारी भी आलोचना करेंगे। अगर किसी मामले में हाई प्रोफाइल व्यक्तियों की संलिप्तता पाई जाती है तो मीडिया रात-दिन उसकी कवरेज दिखाता है। मीडिया को यह जान लेना चाहिए कि इस तरह से वे न्यायपालिका को वे प्रभावित नहीं कर सकते हैं।’
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