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कुर्सी प्रेम में केजरीवाल ने लाखों आप कार्यकर्ताओं से किया धोखा, आदतन झूठे हैं कुर्सी के पिस्सू

Tue, 29 May 2018 04:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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kumar vishwas and kejriwal
आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास ने अरुण जेटली को लिखे माफीनामे में अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। अपने पत्र में विश्वास ने केजरीवाल को आदतन झूठ बोलने वाला शख्स करार दिया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने कुर्सी प्रेम में लाखों आप कार्यकर्ताओं से धोखा किया। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमले को विश्वास ने बतौर पार्टी कार्यकर्ता अपने नेता की बात दोहराने का मामला कहा है। जेटली को लिखे पत्र में कुमार विश्वास ने पूरे मामले में पक्ष स्पष्ट किया। पेश हैं खत के कुछ प्रमुख अंश---
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कुमार विश्वास - फोटो : सोशल मीडिया
हमने सिर्फ अरविंद की बात को दोहराया मान्य जेटली जी, हमने अरविंद केजरीवाल को अपने दल का सर्वोच्च नेता चुना था। अरविंद अक्सर कुछ कागज जमा करके हम सबको और बाद में हमारे माध्यम से कार्यकर्ताओं व जनता को, वे कागज कमोबेश हर दल के नेता के भ्रष्टाचार के सबूत कहकर दिखाते रहते थे। कार्यकर्ता की तरह हम सबने भी उनकी बातों पर सदा आंख मूंद कर भरोसा किया था। बहुधा पार्टियों के शीर्ष नेता जब कोई बड़ा सार्वजनिक बयान देकर स्टैंड लेते हैं, तो दल का आखिरी कार्यकर्ता भी वही बात दोहराता है। हम सबने भी बिना सच-झूठ परखे, बिना अपने नेता पर शंका किए उसके हर कथन को अक्षरश: दुहराया। आम आदमी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं और करोड़ों शुभचिंतकों ने भी अरविंद की हर कुतार्किक बात पर आंख मूंदकर भरोसा किया। जब अरविंद ने आपको या नितिन गडकरी या कपिल सिब्बल या अनेक नेताओं, पत्रकारों, व्यापारियों को भ्रष्टाचारी कहा, तो हम सबने उन्हीं की बात को अक्षरश: दोहराया।
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kumar vishwas
सजा के डर से माफी मांगी मैंने अरविंद को अनेक बार आगाह भी किया कि अधकचरे होने पर सिर्फ गद्दी हथियाने की लालसा से भरकर कोई आरोप मत लगाओ। इससे तुम्हारी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। किंतु उसने हर बार चीख-चीखकर कहा कि उसके ये सारे तथाकथित सबूत स्वराज किताब की तरह ही असली हैं। कानून के जानकारों ने अरविंद को बताया कि आरोप झूठे सिद्ध होने पर कुछ दिन की जेल निश्चित है। अरविंद को लगने लगा कि अगर कुछ दिन के लिए भी जेल हुई, तो मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। मनीष को मुख्यमंत्री बनाना होगा। ऐसी परिस्थिति में सजा से वापस आने पर मनीष सीएम की गद्दी वापस नहीं देगा। इसलिए अरविंद ने पहले समझौते की कोशिश की और उन कोशिशों के असफल होने पर खुद ही लिखित माफी मांगना शुरू कर दिया।

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kumar vishwas - फोटो : सोशल मीडिया
कुर्सी के पिस्सू  मान्य जेटली जी, इस पूरी कवायद में उन्होंने मेरे और संजय जैसे वरिष्ठ दोस्तों, नेताओं, कार्यकर्ताओं तक से न तो सलाह की, न ही हमें सूचित किया। ऐसा करके अरविंद ने सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले हजारों साथी कार्यकर्ता को अकेले लड़ने के लिए छोड़ दिया। मेरे व हजारों कार्यकर्ताओं व देशवासियों के लिए योद्धा स्वराज-मार्गी अरविंद का ‘कुर्सी के पिस्सू’ में बदलने का चौंकाने वाला रूपांतरण था। वो थूककर बारंबार चाटेंगे, ऐसी वीभत्स कल्पना इस देश में उनके राजनीतिक शत्रुओं तक ने नहीं की थी।
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kumar vishwas - फोटो : सोशल मीडिया
सस्ती लोकप्रियता के लिए बोले झूठ अरुण जी, अब जब हमारे नेता ने ही मान लिया कि वह सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक फायदे के लिए अनर्गल झूठ बोलने वाला आदतन झूठा है, तो मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के लिए सहज है कि हम सब भी खेद प्रकट करके एक झूठे इंसान के द्वारा फैलाए प्रपंच से पिंड छुड़ाएं। जब सचमुच कोई सबूत नहीं था, तो किस आधार पर इतना बड़ा वितंडा रचा गया? जिन कुछ लोगों द्वारा गलत सबूत देने का फर्जी बहाना रचकर अरविंद इस मड स्लेजिंग की घटिया हरकत पर पर्दा डालना चाहता है वो कुछ लोग कौन थे?
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kumar vishwas
सबूतों का कागजी गोबर थमाया इस केस में न तो वह तथाकथित-सबूत देने को तैयार है न ही मिलकर ये बताने को तैयार है कि वे नरपुंगव कौन थे जो दिनरात आरोप लगा कर लड़ने वाले एक योद्धा के हाथ में बारूद के नाम पर सबूतों का कागजी गोबर थमाकर, बचकर निकल लिए? मान्य अरुण जी, हम किससे माफी मांगे? आप से? आप के परिवार से? नितिन जी सरीखे अन्य नेताओं या मीडिया मुगलों से?
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kumar vishwas
उन कार्यकर्ताओं से कौन माफी मांगेगा यदि हम आप सब से इसकी माफी मांगते हैं और आशा है कि इस विवाद के पटाक्षेप होने के बाद हम सब अपनी-अपनी दुनिया में लौट भी जाएंगे, तो भी उन सब लाखों साथी कार्यकर्ताओं से माफी कौन मांगेगा जिन्होंने एक सत्तालोलुप कायर झूठे के कहे पर अपना-अपना परिवार-कैरियर-सपने सब दांव पर लगा दिए? उन बच्चों से माफी कौन मांगेगा जिन्होंने एक कायर झूठे के कहने को सच समझ कर आप सब के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया, पुलिस की लाठियां खाईं, लोगों के मजाक के पात्र बने, कॅरियर के शुरुआती दौर में अपने खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए और आज भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं?

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kumar vishwas - फोटो : सोशल मीडिया
आशा है आप हमारा दर्द समझेंगे मान्य अरुण जी, अब हाल ये है कि आप के सामने केस लड़ने के लिए सहमत मेरे निजी वकील को भी हमारी पार्टी ने पद से हटा दिया है। आप वकील हैं, इस सब बेशरम झूठ-कथा से निश्चित ही आपकी मानहानि हुई है, तो हो सकता है कि आप सोचें कि आपको भला इन सब बातों से क्या लेना-देना?  आप को और आप के परिवार-शुभचिंतकों को हमारे आदतन झूठे नेता के निराधार आरोप और हमारे उसके झूठ को दोहराने से जो कष्ट हुआ है उसके लिए हमें खेद है, आशा है कि आप भी हम सब का ये सार्वजनिक दर्द समझेंगे। मैं कवि हूं, इस पत्र के समाहार में शायद इन चार पंक्तियों से अपनी मन:स्थिति को ठीक से बयां कर सकूं।
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कुमार विश्वास
पराये आंसुओं से आंख को नम कर रहा हूं मैं,
भरोसा आजकल खुद पर भी कुछ कम कर रहा हूं मैं,
बड़ी मुश्किल से जागी थी जमाने की निगाहों में,
उसी उम्मीद के मरने का मातम कर रहा हूं मैं!                                                     
आपके उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ
-कुमार विश्वास
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