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मोदीनगर अग्निकांडः धड़ल्ले से चल रही हैं अवैध फैक्टरियां, प्रशासन को है खबर लेकिन बन रहा बेखबर 

Mon, 06 Jul 2020 04:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
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आग लगने के बाद... - फोटो : अमर उजाला
पुलिस की सरपस्ती में एक वर्ष से अवैध फैक्टरी चलते रही लेकिन स्थानीय स्तर पर तहसील प्रशासन पूरे मामले से बेखबर रहा। बीते वर्ष दीपावली पर प्रशासन की तरफ से एनजीटी के सख्त रुख को देखते हुए पूरे जिले में अभियान चलवाया गया। लोनी से भारी मात्रा में पटाखे व ज्वलनशील सामग्री भी जब्त की गई लेकिन लोनी तहसील की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि अब पता चल रहा है कि फैक्टरी बीते एक वर्ष से संचालित थी यानी कि जांच अभियान के वक्त फैक्टरी संचालित थी। अब सवाल यह भी खड़ा होता है कि पुलिस की सरपरस्ती में यह सब चल रहा था तो स्थानीय स्तर पर तहसील प्रशासन के अधिकारी क्यों नहीं पकड़ पाए।
  
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घटना के बाद... - फोटो : अमर उजाला
 पुलिस की सरपरस्ती में सारा काम चलता रहा और बाकी सभी विभाग अंजान बन रहे। जबकि फैक्टरी में लेबर कानूनों का उल्लंघन हो रहा था। नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा था। उधर, फायर सेफ्टी के नियमों का कहीं कोई पालन नहीं था लेकिन फायर बिग्रेड विभाग फैक्टरी को लेकर अंजान बना रहा। जबकि आसपास के लोग फैक्टरी चलने से काफी परेशान थे। उन्होंने पुलिस के अतिरिक्त अन्य विभागों में भी मामले की शिकायत की लेकिन कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। 

 
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गुस्से और दहशत में लोग... - फोटो : अमर उजाला
लोनी के बाद मोदीनगर बना गढ़ः अभी तक लोनी पटाखे व अन्य ज्वलनशील उत्पाद बनाने का गढ़ रहा है लेकिन बीते वर्षों में लोनी पर प्रशासन का विशेष ध्यान रहा है। वहां पर लगातार कार्रवाई भी की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में फैक्टरियां लोनी से शिफ्ट होकर मोदीनगर क्षेत्र में पहुंच गई हैं। 

 

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आरोपों के घेरे में पुलिस भी - फोटो : अमर उजाला
देहात क्षेत्र होने की वजह से लोगों को चलाने में भी कोई दिक्कत नहीं है। हादसे के बाद प्रशासन की तरफ से जांच शुरू कराई गई तो काफी संख्या में फैक्टरियां मोदीनगर क्षेत्र में संचालित होने की सूचना मिल रही है। इसके बाद अब सोमवार से विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि मोदीनगर में पुलिस से सेटिंग के जरिए फैक्टरी संचालित हो रही हैं।

 
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गुस्साये लोग - फोटो : अमर उजाला
फूटा ग्रामीणों का गुस्साः ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवैध फैक्टरी के संबंध में अवगत कराया गया था, लेकिन हर बार दोनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देते थे। इसी लापरवाही का नतीजा रविवार को अग्निकांड के बाद बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ा।
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