दिल्ली में डेंगू और चिकगुनिया का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। इन दोनों बीमारियों की दहशत के बीच इनसे बचने के उपायों को लेकर एक नुस्खा तेजी से वायरल हो रहा है जिसे जाने अपनजाने लोग सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर कर रहे हैं। जानिए क्या है इस नुस्खे की पूरी सच्चाई....
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असल में डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही बीमारियां मच्छर के काटने से फैलती हैं। जुलाई-अगस्त में बरसात के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और इन मच्छरों से ही इन दोनों बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ता है।
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इन दोनों बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच सोशल मीडिया पर ये मैसेज तेजी से फैल रहा है कि नींबू और लौंग से डेंगू का मच्छर भाग जाता है।
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इस नुस्खे को कारगर बनाने के लिए जो तरीका बताया जा रहा है उसमें कहा गया है कि एक नींबू को दो हिस्सों में बांट कर इसमें साबूत लौंग के 10-15 पीस इसमें गाड़कर अगर कमरे में रख दिया जाए तो इससे कमरे में डेंगू के मच्छर नहीं आएंगे।
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आमतौर पर बीमारियों से बचने के देसी नुस्खों का प्रचलन में आना कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों को भगाने के इस नुस्खे के कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
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इस बारे में डॉक्टरों को कहना है कि हमें देसी नुस्खों की जगहर अगर हम इस बात पर ध्यान दें कि घर के किसी भी हिस्से में डेंगू मच्छर के लार्वा पैदा ही न हों तो बीमारी पर आसानी से नियंत्रण लगाया जा सकता है।
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असल में डेंगू के लार्वा जमा हुए साफ पानी में पनपते हैं और यहीं से बीमारी का जन्म होता हे। ऐसे में अगर हम घरों में पानी जमा ही न होने दें तो इस बीमारी पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है।
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कहां से आई चिकनगुनिया बीमारी : चिकनगुनिया शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है वह जो झुका दे..., यह वायरस से होने वाला बुखार है। एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर, जिसे पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं, इसके काटने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है।
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चिकनगुनिया
- फोटो : अमर उजाला
चिकनगुनिया बीमारी के लक्षण:
- मच्छर काटने के 2 से 7 दिनों के बाद चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते हैं।
- शरीर पर चकते निकलना, जी मिचलाना, भूख कम लगना, कमजोरी आना, बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द होना।
व्यक्ति इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी कार्य करने में असमर्थ पाता है।
- कई बार जोड़ों का दर्द महीनों से लेकर साल भर तक रहता है। खासकर उम्रदराज लोगों को।
- आमतौर पर चिकनगुनिया बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता, लेकिन उम्रदराज लोगों (60 वर्ष या उससे अधिक आयु) के लिए यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।