छोटी होली यानी होलिका दहन आज होगा। इसके लिए मुहूर्त भी तय है। रात्रि 8.06 से 9.35 मिनट तक विशेष मुहूर्त है। होली के आठ दिन पूर्व शुरू हुआ होलाष्टक दोष भी आज रात होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाएगा।
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फाइल फोटो
राजीव कॉलोनी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के महंत आचार्य सर्वेश्वरनाथ पांडे ने बताया कि भद्रा के बाद होलिका दहन होगा। 12 मार्च से लगी पूर्णिमा बुधवार 20 मार्च को रात्रि 8:05 मिनट पर खत्म होगी।
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इसके बाद ही होलिका दहन हो सकता है। रात्रि 8:06 बजे से 9:35 बजे के बीच होलिका दहन का विशेष मुहूर्त है। इसके बाद रात 11:05 बजे तक होलिका दहन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज के दिन घरों में सत्यनारायण भगवान की पूजा अर्चना की जा सकती है।
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- फोटो : अमर उजाला
हवन किया जा सकता है, बड़े अनुष्ठान करना वर्जित है। होलाष्टक दोष होने के कारण व्यक्ति को अनुष्ठान का फल नहीं मिलता है, जो व्यक्ति बड़े अनुष्ठान करता है वह होली माता का भाग हो जाता है।
बल्लभगढ़ अंबेडकर चौक स्थित शनिदेव मंदिर के पास शहर की सबसे बड़ी और प्राचीन होली जलाई जाती है। मान्यता है कि यहां होली दहन स्थल यहां के राजाओं ने चिन्हित किया था। महंत डॉ. बांके बिहारी ने बताया कि करीब 100 साल पूर्व राजा साही किले के पास उनके पूर्वजों ने होलिका दहन के लिए स्थान तय किया था। पास में ही बल्लभगढ़ वासियों की कुल देवी पथवारी माता का मंदिर है। यहां पूजा अर्चना करने के बाद माता बहनें होलिका दहन के लिए पहुंचती हैं। कुल देवी की पूजा करने से लोगों की सभी माना कामनाएं पूर्ण होती है।