प्रेम संबंध टूटने के बाद महिलाएं सहमतिपूर्ण शारीरिक संबंध को दुष्कर्म बता देती हैं। यह तल्ख टिप्पणी हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में एक शख्स की बेगुनाही को कायम रखते हुए की है। निचली अदालत ने आरोपी सरकारी अधिकारी को बरी किया था लेकिन उसकी पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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DELHI HIGH COURT
जस्टिस प्रतिभा रानी ने यह टिप्पणी महिला याची की याचिका खारिज करते हुए की है। महिला ने इस शख्स पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था लेकिन बाद में 2015 में उससे शादी कर ली थी। याची ने कुछ समय पहले ही पति पर घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर किया है।
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- फोटो : getty images
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि महिलाएं गुस्से व कुंठा के कारण सहमति से बने शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म बताती हैं, इससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। शादी का झांसा देेकर दुष्कर्म की शिकायतों के मामलों में सहमति पूर्ण संबंध व दुष्कर्म में स्पष्ट अंतर है।
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निचली अदालत ने आरोपी को मार्च 2016 में दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया था। महिला ने नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट के समक्ष अपने बयान से मुकर गई थी।
महिला ने पहले दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करवाया लेकिन उसके बाद एफआईआर रद्द करवाने के लिए उसने आरोपी के साथ पहले हाईकोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों अदालतों ने महिला की अर्जी खारिज करते हुए मुुकदमा लड़ने का आदेश दिया था।