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दिल्ली-NCR: अब नहीं जागे तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम, इन पांच फैसलों से कम हो सकता है प्रदूषण

Fri, 01 Nov 2019 05:01 PM IST
पूजा त्रिपाठी योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
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pollution in delhi ncr - फोटो : पीटीआई
दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा में लगातार जहर बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण(ईपीसीए) ने दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। इसके तहत दिल्ली के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश भी मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जारी कर दिया है। प्रदूषण के मामले में दिल्ली-एनसीआर के अधिकतर शहरों का हाल बहुत बुरा है। इसके ज्यादातर शहर टॉप-10 में शामिल हैं।

प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए महज कागजों में इंतजाम होते हैं। नतीजतन, हर साल सांसों पर संकट बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण में घुल रहा जहर आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली हो, हाईटेक शहर नोएडा-ग्रेटर नोएडा हो या औद्योगिक नगरी फरीदाबाद या फिर साइबर सिटी गुरुग्राम। सबसे बुरी स्थिति तो गाजियाबाद की है।

इन शहरों का हर शख्स न चाहते हुए भी हर सांस में जहर निगल रहा है। जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। आगे जानिए क्या हैं वो पांच फैसले जिन्हें लेकर दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण काफी हद तक कम किया जा सकता हैै और साल भर लगने वाले ट्रैफिक से भी निजात मिल सकती है..

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pollution in delhi ncr - फोटो : पीटीआई

इन पांच फैसलों से बन सकती है बात

1:- सम-विषम फॉर्मूला होगा असरदार
सम-विषम का फॉर्मूला दिल्ली में असरदार साबित हो सकता है तो इसे एनसीआर के अन्य शहरों पर लागू क्यों नहीं किया जा सकता। एक दिन सम और एक दिन विषम नंबर के वाहनों के संचालन का नियम बड़ी राहत देने वाला साबित हो सकता है। एक अनुमान के मुताबिक ऐसा करने से सड़कों पर वाहनों की संख्या घटकर आधी रह जाएगी।
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pollution in delhi ncr - फोटो : ani
2:-शिफ्ट और अवकाश में हो बदलाव
दिल्ली-एनसीआर के सरकारी दफ्तर हों या फिर निजी कंपनियां। साप्ताहिक अवकाश का दिन एक ही होता है। ऐसे में अवकाश का दिन अलग-अलग तय होने से सड़कों पर ट्रैफिक का लोड और प्रदूषण का स्तर भी कम होगा। साथ ही, ऑफिस टाइमिंग में बदलाव की भी बड़ी जरूरत है। अधिकांश जगह सुबह 9 से शाम 5 बजे की शिफ्ट होती है।

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pollution in delhi ncr - फोटो : ani
3:-निजी वाहनों पर लगे कंजेशन शुल्क
लंदन, स्वीडन, सिंगापुर और मिलान जैसे शहरों में निजी वाहनों के इस्तेमाल पर कंजेशन शुल्क का प्रावधान है। देश के सबसे प्रदूषित शहरों में भी ऐसा ही नियम लागू किया जाना चाहिए। निजी वाहनों का प्रयोग महंगा होगा तो विकराल हो रही प्रदूषण की समस्या से निपटा जा सकेगा। पार्किंग के विवाद और जाम की समस्या पर भी अंकुश लगेगा।
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मास्क पहनकर दिल्ली में अभ्यास करते बांग्लादेशी क्रिकेटर - फोटो : पीटीआई
4:-सार्वजनिक परिवहन को मिले बढ़ावा
जनसंख्या घनत्व के हिसाब से वर्ष 2031 तक में नोएडा की आबादी 25 लाख तक पहुंचने का आंकलन है। ऐसे में आबादी के बढ़ते बोझ की तरफ इशारा करते ये आंकड़े सक्षम सार्वजनिक जन यातायात व्यवस्था की फौरी जरूरत पर बल देते हैं। हालांकि, मेट्रो ने लोगों की राह आसान बनाई है, लेकिन मेट्रो तक पहुंचना आसान नहीं हो पाया है।
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pollution in delhi ncr - फोटो : पीटीआई
5:-एसटीएफ के हाथों में हो निगरानी
प्रदूषण से निपटने के लिए जो नियम बनाए जाते हैं वो अगर सख्ती से लागू किए जाएं तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। इसके लिए सरकार को आईएएस और आईपीएस के नेतृत्व में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) का गठन करना चाहिए। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं होता तो इन अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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pollution in delhi ncr - फोटो : पीटीआई
इनकी भी सुनिये

प्रदूषण से हर साल स्थिति बद से बदतर हो रही है। सारी एजेंसियां और सारे नियम फेल साबित हो रहे हैं। जिंदगी को जोखिम में डाल रही इस सबसे बड़ी समस्या पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। नियम सख्ती से लागू होने चाहिए।-रंजन तोमर, अध्यक्ष-नोवरा

प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत हर साल एक ही होते हैं। इसके बाद भी प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। संकट आने पर हरकत में आने से क्या फायदा। समस्या गंभीर है, सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। आम जन की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।- विक्रांत तोंगड़, पर्यावरणविद्

मौजूदा समय में हर व्यक्ति न चाहते हुए भी जहर निगल रहा है। लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके लिए सिर्फ और सिर्फ एजेंसियां जिम्मेदार हैं। नोएडा प्राधिकरण शहर की सफाई के नाम पर जनता को केवल धोखा दे रहा है।-एनपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष-फोनरवा

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