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Harish Rana Dead: 'रोइए मत, वह अब एक अच्छी जगह पर है', 13 साल की पीड़ा और आंसुओं में डूबी विदाई; अंग दान होंगे

Thu, 26 Mar 2026 08:12 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

13 साल की पीड़ा के बाद हरीश पंचतत्व में विलीन हो गए। छोटे भाई आशीष ने अपनी बहन भावना के साथ मिलकर बड़े भाई की चिता को मुखाग्नि दी। भाई-बहन की सिसकियां सिर्फ एक विदाई नहीं थीं, बल्कि उन वर्षों के दर्द का विसर्जन थीं, जो उन्होंने हर दिन जिया था।
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Harish Rana - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में बुधवार को हरीश राणा का पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के सदस्यों के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले आध्यात्मिक आंदोलन ब्रह्म कुमारी के प्रतिनिधि भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान माहौल बेहद भावुक था और हर किसी की आंखें नम नजर आईं। गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसाइटी के निवासी भी अपना समर्थन देने के लिए वहां पहुंचे। इस समूह में विभिन्न एनजीओ, एम्स के कर्मचारी, रिश्तेदार और दोस्त भी शामिल थे।
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार से पहले शोक के साथ एक गहरी खामोश राहत भी महसूस की जा रही थी। 13 वर्षों तक कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे हरीश राणा को आखिरकार इच्छामृत्यु के बाद उस पीड़ा से मुक्ति मिल गई, जिसने उनके साथ पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया था। 

 
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर जैसे ही एम्बुलेंस से उतारा गया, हर आंख नम थी। इन आंसुओं में बिछड़ने का दर्द तो था ही लेकिन एक लंबे कष्ट के अंत की थकी हुई राहत भी नजर आई। गुलाब की पंखुड़ियों से सजी चिता के सामने खड़े लोग मानो उस संघर्ष के गवाह थे, जो हरीश ने वर्षों तक बिना कुछ कहे सहा। 

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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर को जब चिता पर रखा गया, तो कांपते हाथों से केसरिया मालाएं अर्पित की गईं। उस पल हर चेहरा बीते 13 वर्षों की यादों से भरा था। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब छोटे भाई आशीष राणा ने बहन भावना के साथ मिलकर मुखाग्नि दी। भाई-बहन की सिसकियां सिर्फ एक विदाई नहीं थीं, बल्कि उन वर्षों के दर्द का विसर्जन थीं, जो उन्होंने हर दिन जिया था। 
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
हिंदू रीति-रिवाजों और ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक परंपराओं के बीच शांति पाठ हुआ। मंत्रों की गूंज के बीच यह एहसास साफ था कि हरीश अब उस पीड़ा से मुक्त हैं, जिसने उनके जीवन को एक लंबी खामोश कैद बना दिया था।
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने दी सांत्वना
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव मदद के लिए तैयार है। संस्था की सदस्य लवली ने कहा कि परिवार ने पिछले 13 वर्षों में काफी कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आध्यात्मिक मार्ग पर चलते रहे।
 
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश की पसंद के भोजन के व्यंजन होंगे तैयार
लवली ने कहा कि शरीर तो इस नश्वर संसार को छोड़कर जा रहा है, लेकिन आत्मा अमर है। उसने एक नई यात्रा शुरू कर दी है। सिस्टर लवली ने बताया कि आने वाले दिनों में ब्रह्मा कुमारीज की ओर से एक भोग (प्रसाद) और प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें हरीश को पसंद आने वाले व्यंजन तैयार किए जाएंगे।

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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि हरीश पिछले एक दशक से भी अधिक समय से कुछ खा नहीं पा रहे थे। अब उनकी आत्मा मुक्त हो गई है। एक प्रतीकात्मक रूप में वह उन्हें वह भोजन अर्पित करेंगे जो उनके शरीर को प्रिय था।

 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिवार ने किया अंग दान का फैसला
अंतिम संस्कार में परिवार ने कहा कि रोइए मत, वह अब एक अच्छी जगह पर है। उनके माता-पिता अशोक राणा और निर्मला देवी ने सभी से शोक व्यक्त करते हुए शांति बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही, पड़ोसियों और शुभचिंतकों ने परिवार के उस अटूट समर्पण की सराहना की, जिसके साथ उन्होंने पिछले कई वर्षों के दौरान भावनात्मक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए भी हरीश की देखभाल की। 

 

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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंतिम संस्कार और उससे जुड़ी रस्में पूरी करने के बाद परिवार अपने गाजियाबाद स्थित आवास लौट गया। हरीश के परिवार ने उनके अंग दान करने का फैसला लिया है। इससे उनके पांच अंगों का जीवन दूसरों के लिए आशा बन जाएगा।

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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए।

 
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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी थी। मंगलवार को एम्स में हरीश का निधन हो गया था।


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