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Harish Rana Dead: बेसुध बेटे को घर की हर बात बताती थीं हरीश राणा की मां, पलक झपकाने का भी घंटों करती थी इंतजार

Wed, 25 Mar 2026 11:24 AM IST
Sharukh Khan सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हरीश की मां ने बेटे की हालत को लेकर बताया कि वह लंबे समय से बेसुध था और अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर पाता था। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसका बच्चा अपनी तकलीफ तक न बता सके। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह-शाम उसकी मालिश करती थी और उसे घर की सारी बातें सुनाती थीं। 
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harish rana - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
असहनीय दर्द सहते हुए 13 साल बाद हरीश राणा इस दुनिया से विदा जरूर हो गए, लेकिन उनके माता-पिता ने अपने बेटे को अमर बनाने का ऐसा फैसला लिया है, जो दर्द को भी एक नई रोशनी देगी।

आंसुओं से भरी आंखों के बीच उन्होंने हरीश के हार्ट वॉल्व और कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया, ताकि किसी और की धड़कनों में उनका बेटा जिंदा रह सके और किसी की अंधेरी दुनिया में फिर से उजाला लौट सके, जिस घर में सन्नाटा पसरा है। वहीं, से अब कई जिंदगियों को नई उम्मीद मिलेगी। 

 
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि त्याग, साहस और इंसानियत की ऐसी कहानी है, जो हर दिल को छूकर आंखें नम कर देती है। भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले शख्स हरीश राणा का एम्स में मंगलवार को शाम 4:10 बजे निधन हो गया। वह पिछले 13 साल से कोमा में थे। 
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बेटे हरीश के साथ पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश राणा को 14 मार्च को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स के कैंसर अस्पताल की देखभाल यूनिट में लाया गया था। सूत्रों के अनुसार, उनके माता-पिता की सहमति से एम्स में उनकी दोनों आंख के कॉर्निया व हृदय के वाल्व दान किया गया गया। हालांकि, एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हरीश का हृदय, किडनी व लिवर दान नहीं हो सकता था। लेकिन, परिवार की सहमति से दोनों कॉर्निया व हृदय के चारों वाल्व लेकर सुरक्षित रख दिया गया है।

 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। हरीश के परिजनों ने उनकी मौत के बाद हरीश के क्रियाशील अंगों को दान करने की इच्छा जताई थी।
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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेसुध बेटे को घर की हर बात बताती थीं हरीश राणा की मां
हरीश की मां ने बेटे की हालत को लेकर बताया कि वह लंबे समय से बेसुध था और अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर पाता था। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसका बच्चा अपनी तकलीफ तक न बता सके। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह-शाम उसकी मालिश करती थी और उसे घर की सारी बातें सुनाती थीं। 

 
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आज क्या हुआ, कौन आया, क्या-क्या हुआ। कई बार घंटों तक इंतजार करती रहती थी कि वह एक बार पलक झपका दे, ताकि मुझे लगे कि उसने मेरी बातें सुन लीं। उन्होंने कहा कि बेटे की छोटी-छोटी हरकतें ही उनके लिए सुकून का सहारा थीं।

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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टीम में थे ये विभाग शामिल
इससे पहले मरीज की देखभाल को लेकर डॉक्टर पूरी तरह सतर्क थे। एम्स की पूर्व ऑन्को-एनेस्थीसिया प्रमुख डॉ सुषमा भटनागर ने बताया था कि इस प्रक्रिया में मरीज को दिए जाने वाले पोषण को धीरे-धीरे कम किया जाता है या बंद किया जाता है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे किसी प्रकार का दर्द न हो। इसके लिए लगातार दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं।
 

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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वीडियो हुआ था वायरल
एम्स ले जाने से पहले हरीश राणा के गाजियाबाद स्थित घर से एक भावुक दृश्य सामने आया था, जिसने लोगों को प्रभावित किया। वायरल हुए वीडियो में ब्रह्मा कुमारी संस्था की एक महिला सदस्य उनके माथे पर तिलक लगाते हुए कहती हैं कि सभी को क्षमा करते हुए और सबसे माफी मांगकर अब शांति से विश्राम करें।
 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

 

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Harish Rana Case - फोटो : वीडियो ग्रैब
गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए।

 
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हरीश राणा का फ्लैट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी थी।

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