ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में 38वें हैंडीक्राफ्ट मेले की शुरुआत हुई। यह मेला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ की ओर पहला कदम है। (फोटोः हिमांशु सोनी/अमर उजाला)
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देखिए, 'मेक इन इंडिया' में चीन-जापान का कैट वॉक
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चीन और जापान के लोग अपनी संस्कृति, भाषा और अपने उत्पादों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन भारतीय हस्तशिल्प की बेजोड़ गुणवत्ता अब इन देशों के लोगों को आकर्षित करने लगी है। बीते वर्ष हैंडीक्राफ्ट के निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है।
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इन दोनों देशों में भारतीय शॉल और लकड़ी के सामान की अच्छी मांग है। पीएम नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा और चीन के राष्ट्रपति की भारतीय यात्रा के बाद से निर्यातक बेहद उत्साहित हैं।
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एक्सपो मार्ट में शुरू हुए ईपीसीएच के हैंडीक्राफ्ट मेले में केंद्रीय राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने भी चीन और जापान के बाजार की ओर बढ़ने पर जोर दिया है। दरअसल, जापान में 2013-14 में हुए निर्यात में 2012-13 के मुकाबले 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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वुडन हैंडीक्राफ्ट के निर्यात में 56.58 फीसदी, शॉल के निर्यात में 55.64 फीसदी, हैडप्रिंटेड टेक्सटाइल व स्कार्फ में 31.44 फीसदी, कस्टम ज्वेलरी में 12.29 फीसदी और मेटल हैंडीक्राफ्ट में 10.52 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
चीनी बाजार से भी भारतीय हस्तशिल्प को अच्छा ऑर्डर मिल रहा है। पिछले साल के मुकाबले 2013-14 में चीन से होने वाले निर्यात में 35.45 फीसदी बढ़ोतरी हुई। शॉल एंड आर्टवेयर में 58 फीसदी, वुडन हैंडीक्राफ्ट में 56 फीसदी, फैशन ज्वेलरी में 47 फीसदी, जरी के में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।