गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व राजधानी में हर्षोल्लास से मनाया गया।
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guruparv in bangla sahib gurudwara
- फोटो : जीपाल/अमर उजाला
इस मौके पर सभी धर्मों के लोगों ने गुरुद्वारे जाकर अरदास की और कई लोगों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के भाई लक्खीशाह वणजारा हॉल में गुरमत समागम करवाया।
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वहीं, प्रचारकों ने जहां गुरबाणी कीर्तन व कथा विचारों ने गुरमत प्रचार किया तो बच्चों को धर्म और विरासत से जोड़ने के लिए गुरबाणी प्रतियोगिता व पगड़ी मुकाबले भी करवाए गए।
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इस अवसर पर पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार में खास योगदान देने वाली लोगों को सम्मानित भी किया गया।
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कार्यक्रम में कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने धर्मों के बीच लकीरें खींचने की कोशिश करने वालों को संकीर्ण मानसिकता का बताया।
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जीके ने कहा कि कोई भी धर्म समाज को तोड़ने की बात नहीं करता।
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उन्होंने गुरुनानक साहिब के बुनियादी सिद्धांत किरत करना, नाम जपना व बांट कर खाने को जीवन में उतारने की अपील की।
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इस दौरान पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के उपकुलपति डॉ. जसपाल सिंह ने कहा कि गुरुनानक देव ने 20 रुपये का सच्चा सौदा कर लंगर प्रथा को शुरू कर ऐसी प्रेरणा दी कि आज सारी दुनिया में सिख पंथ की बड़ी पहचान लंगर के कारण भी है।