गुरुद्वारा कमेटी प्रधान शेर दिल सिंह से शुक्रवार को नागरिक एकता मंच का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की
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गुरुद्वारे के बेसमेंट की जगह को नमाज के लिए देने से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम समुदाय ने 1984 में दंगों के समय सिखों की बहुत मदद की थी, उनकी जान व माल की रक्षा की थी, इसलिए उनसे समाज को सद्भावना है। वहीं विभाजन के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आए पंजाब के सिखों को आज भी देश में रिफ्यूजी कहा जाता है, यह बहुत बुरा लगता है। गुरुद्वारे में नमाज अदा करने की पेशकश करने वाले गुरुद्वारा कमेटी प्रधान शेर दिल सिंह से शुक्रवार को नागरिक एकता मंच का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की। पेशकश के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।