कंपनी के बाहर तैनात पुलिस कर्मी
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हम लोग श्रमिकों के वेतन वृद्धि के खिलाफ नहीं है मगर सरकार को उद्यमियों की भी समस्याएं सुननी चाहिए थी। बगैर उनकी समस्या सुने उनपर श्रमिकों के वेतन वृद्धि का बोझ लादना उचित नहीं है। - विकास गुप्ता, अध्यक्ष मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
हमलोग शांति पूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं तो सरकार सुनने को राजी नहीं होती है। श्रमिकों के हंगामे और तोड़फोड़ का असर एक दिन में हो गया। अभी सरकार को अचानक मजदूर दर वृद्धि के निर्णय लेने से पहले उद्यमियों का पक्ष भी लेना चाहिए था। अभी उद्योग जगत संकट से गुजर रहा है। - भरत गोयल, उद्यमी आईएमटी मानेसर
उद्योग जगत अमेरिकी टैरिफ, ईरान इस्त्राइल युद्ध के कारण लागत में वृद्धि, ईंधन संकट, श्रमिकों के पलायन से गुजर रहा हैं, यह मजदूरी दर बढ़ाने के लिए यह सही समय नहीं है। इसका कुछ बोझ सरकार को भी वहन करना चाहिए। वे जीएसटी में कमी कर हमें सहयोग कर सकते हैं। - आशु झिंगन, उद्यमी आईटीएम मानेसर
मजदूरों के प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल बैठक की और यह निर्णय लिया है, यह मजदूरों के लिए तो बेहतर है, ही उद्योगों के लिए और पूरे देश के लिए बेहतर है। मजदूरी दर बढ़ाने की यह घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने बजट भाषण में कर चुके थे। - मनोज त्यागी, महासचिव आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दर 4000 रुपये की वृद्धि करके एक अच्छा कदम उठाया है मगर हमारी मांगे अभी पूरी नहीं हुई है। महंगाई को देखते हुए हम लोगों ने न्यूनतम मजदूरी दर 26000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी थी। -अनिल पवार, राज्य महासचिव, एटक, संयोजक ट्रेड यूनियन काउंसिल