गगनचुंबी इमारतों के लिए गुरुग्राम देशभर में पहचान बना चुका है, लेकिन इन्हीं के बीच सरकारी स्कूलों की हालत खंडहर जैसी है। इनमें जल्द सुधार की कोई उम्मीद भी नहीं है, क्योंकि स्कूलों के लिए बजट का सालों तक इंतजार करना पड़ता है। शिक्षा निदेशालय और सरकार की इसी सुस्ती का उदाहरण हैं धनवापुर और इस्लामपुर के सरकारी स्कूल। धनवापुर के विद्यालय की इमारत जरजर घोषित हो चुकी है। इसकी स्थिति इतनी खराब है कि कमरों की छतें तक गिर चुकी हैं।
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गुरुग्राम के सरकारी स्कूल की हालत
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी अब तक नई इमारत बनाने का कार्य शुरू नहीं हुआ है। आसपास के निवासियों ने बताया कि यह स्कूल करीब 50 साल पुराना है। इमारत की स्थिति को देखते हुए छात्र वर्षों से खुले में बैठकर ही पढ़ते रहे हैं। इस सत्र में भी 350 से ज्यादा छात्र इस स्कूल में पढ़ेंगे। हालांकि उन्हें कक्षाओं के बजाय खुले में बैठकर ही पढ़ना होगा। खास बात है कि 6 महीने पहले ही इस स्कूल की बिल्डिंग को बनाने के लिए 2 करोड़ 39 लाख का ई-टेंडर निकाला गया है। हालांकि निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है।
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दूसरी ओर, शहर से जुड़े हुए इस्लामपुर स्कूल में नौ कमरे बनाने के लिए बजट आया, लेकिन काम रुक गया। इस्लामपुर स्कूल के प्राचार्य राजकुमार ने बताया कि स्कूल की हालत विद्यार्थियों को बिठाने लायक नहीं है। प्राचार्य और कंप्यूटर कक्ष सहित सिर्फ 4 कमरे उपलब्ध हैं। छात्रों की संख्या करीब 700 है। मार्च में इमारत का निर्माण शुरू किया गया था।
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यहां एक खंभे में केवल एक सरिया डाला जा रहा था। इसे देखकर ग्रामीणों ने ऐतराज किया। उनका कहना है कि भूकंप की स्थिति में यह गिर सकता है। इस पर मार्च की शुरुआत में ही काम रोक दिया गया। तब से निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इस संबंध में विभाग को कई बार लिखा जा चुका है। उधर, झाड़सा के सरकारी स्कूल की प्राइमरी विंग पांच साल से उधार की इमारत में चल रही है।
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अधिकारियों ने साधी चुप्पी
गुरुग्राम में 500 से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं। अधिकतर स्कूलों में छात्रों को जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। अमर उजाला ने अधिकारियों ने इस संबंध में बात करने का प्रयास किया तो वे कुछ भी बताने से बचते नजर आए। धनवापुर के सरकारी स्कूल की प्राचार्य वीना यादव ने बताया कि उन्होंने स्कूल में दो दिन पहले ही पोस्टिंग ली है।
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सरकार और शिक्षा निदेशालय को शिक्षा के स्तर को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। प्रदेश में कई स्कूल खस्ताहाल हैं। किसी स्कूल का बजट पास नहीं होता है तो किसी पर विरोध जारी है। ऐसे में निदेशालय में इन विरोधों का निपटारा करना चाहिए। - सत्यनारायण, प्रदेश उपाध्यक्ष, हरियाणा शिक्षक संघ