लवली दीदी
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तकलीफ शरीर को आत्मा को नहीं
बीके लवली दीदी ने बताया कि आत्मा और शरीर दोनों अलग-अलग बातें हैं। शरीर गाड़ी है और आत्मा ड्राइवर। जब गाड़ी पुरानी होती है या काम नहीं देती तब यह कहा जाता है कि इस गाड़ी को अब छोड़ो और इससे बाहर आ जाओ। इसलिए मैं यह समझती हूं कि हरीश के माता-पिता का यह निर्णय और याचिका दायर करने का फैसला बहुत अंत में उनके मन में आया। बहुत प्यार से उन्होंने बेटे की पालना की। हमेशा बेटे से बातें कीं, ठीक एक छोटे बच्चे की तरह। मां ने बहुत वेदना से इस इच्छा मृत्यु की संकल्पना ली।