गाजियाबाद जिले के मुरादनगर के श्मशान घाट की छत गिरने से 24 लोगों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी मंगलवार को भी डासना जेल पहुंची। एसआईटी ने ठेकेदार अजय त्यागी, संजय गर्ग और सुपरवाइजर आशीष के बयान दर्ज किए। इसके बाद जेल में बंद निलंबित ईओ निहारिका सिंह समेत सभी पांचों आरोपियों का आमना-सामना कराकर कमीशन का खेल जाना।
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Cremation Ground Accident News
- फोटो : अमर उजाला
पांच दिन की जांच-पड़ताल के बाद एसआईटी शाम को लखनऊ रवाना हो गई। बताया जा रहा है कि एसआईटी जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया जा सकता है। एसआईटी ने आठ जनवरी को मुरादनगर पहुंचकर श्मशान घाट की जांच शुरू की थी। टीम ने हादसे के मृतकों के परिजनों के साथ-साथ घायलों से भी बातचीत की थी। पुलिस इस मामले में मुरादनगर नगर पालिका की निलंबित ईओ निहारिका सिंह, ठेकेदार अजय त्यागी, उसके पार्टनर संजय गर्ग, जेई व सुपरवाइजर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
सोमवार को एसआईटी ने डासना जेल जाकर ईओ व जेई के बयान दर्ज किए थे। देर शाम ठेकेदार अजय त्यागी के बयान लिए थे। एसआईटी मंगलवार को फिर जेल पहुंची और अजय त्यागी, उसके पार्टनर और सुपरवाइजर के बयान दर्ज किए। इसके बाद एसआईटी ने तीन इंजीनियरों के भी बयान दर्ज किए। इन्होंने श्मशान घाट में हुए निर्माण को क्लीनचिट दी थी। इसके बाद एसआईटी लखनऊ रवाना हो गई।
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जेल में बंद पांचों आरोपियों के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी ने सभी का आमना-सामना भी कराया। बताया जा रहा है कि एसआईटी में शामिल अधिकारियों ने श्मशान घाट के निर्माण का टेंडर लेने में रिश्वत के लेन-देन की जानकारी की। इसके अलावा निर्माण कार्यों के टेंडर में होने वाली कमीशनखोरी के बारे में जाना। बताया जा रहा है कि अब तक की जांच में एसआईटी को तमाम खामियां मिली हैं। एसआईटी दस दिनों में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। जिसमें कई अन्य लोग भी भ्रष्टाचार के खेल में आरोपी बनाए जा सकते हैं।
सैंपल ले गई रुड़की आईआईटी की टीम
एसपी ग्रामीण एवं श्मशान घाट हादसे की जांच के नोडल अधिकारी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि आईआईटी रुड़की की टीम मुरादनगर श्मशान घाट से मलबे के सैंपल ले गई है। आईआईटी की प्रयोगशाला में विशेषज्ञों द्वारा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि टीम 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। बता दें कि इससे पहले डीएम के आदेश पर बनी समिति ने मौके पर जाकर जांच की थी। जिसमें निर्माण सामग्री व डिजाइन में खामी मिली थी।