गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी निवासी हरीश राणा के घर में हर ओर आध्यात्मिकता की छाप दिखती है। पिता अशोक राणा नियमित रूप से सुबह और शाम ध्यान व पूजा करते हैं।
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी स्थित हरीश राणा के घर में हर और आध्यात्मिक माहौल दिखाई देता है। मुख्य गेट से लेकर घर के अंदर तक प्रजापिता ब्रह्माकुमारी से जुड़े चित्र लगे हैं। ये परिवार की गहरी आस्था को दर्शाते हैं।
पिता अशोक राणा नियमित रूप से सुबह और शाम ध्यान व पूजा करते हैं। शायद यही कारण है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनका विश्वास अडिग बना रहा। वह प्रतिदिन गोमाता को भोजन कराते हैं और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अशोक राणा पेशे से एक कुशल शेफ हैं। सोसायटी के लोगों के अनुसार, वह आसपास के इलाकों में सैंडविच की सप्लाई करते हैं और सप्ताहांत पर खासे व्यस्त रहते हैं। अशोक राणा ने बताया कि पहले वह एक पांच सितारा होटल में कार्यरत थे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए सैंडविच बनाकर बेचना शुरू किया।
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हरीश राणा का फ्लैट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्थानीय निवासी अनिल के अनुसार, अशोक राणा का स्वभाव बेहद मिलनसार है। वह अक्सर लोगों को अपने हाथ का बना सैंडविच खिलाते रहते हैं। मौजूदा कठिन समय में सोसायटी के लोग उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है। वहां चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाया जा रहा है।
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हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इच्छामृत्यु की जारी प्रक्रिया के बीच अंगदान पर भी विचार
अस्पताल के पूर्व पैलिएटिव विशेषज्ञ डॉ. सुशमा भटनागर के अनुसार, पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता, बल्कि दर्द-तकलीफ कम कर प्राकृतिक मौत की अनुमति दी जाती है। फोकस मरीज की आराम और गरिमा पर है।
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हरीश राणा और उसके पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारत के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु को लागू करने के लिए डॉ. सीमा मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया है। डॉ. सीमा मिश्रा एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के अंगदान पर भी टीम कर रही जांच
सूत्रों के अनुसार, हरीश के अंगों को दान करने के परिवार के संकल्प के बाद, एम्स की एक मेडिकल टीम अपने सहयोगियों की मदद से उनके शरीर की पूरी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन से अंग अभी काम कर रहे हैं और दान के लिए सही हैं। इसके बाद पूरी जानकारी और सहमति के साथ अंग निकालने की जरूरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के पूर्वज रहते थे कांगड़ा में
देशभर में चर्चा में रहे इच्छामृत्यु मामले में हरीश राणा का संबंध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से है। हरीश राणा के परिवार की जड़ें जयसिंहपुर उपमंडल की पंचायत सरी के प्लेटा गांव से जुड़ी रही हैं। स्थानीय लोगों ने हरीश राणा के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है।
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बेटे हरीश के साथ पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्षेत्रवासियों का कहना है कि भले ही परिवार लंबे समय से प्रदेश से बाहर रह रहा हो, लेकिन अपने पैतृक स्थान से जुड़ाव हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि जब इस घटना की जानकारी सामने आई, तो लोगों ने इसे अपने क्षेत्र से जुड़ा मामला मानते हुए परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट की।
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बेटे हरीश के साथ मां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उधर, पंचायत सरी की निवर्तमान प्रधान रीमा कुमारी ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हरीश राणा के पूर्वज मूल रूप से प्लेटा गांव के निवासी रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाद में हरीश राणा के पिता अशोक राणा रोजगार और अन्य कारणों से प्रदेश से बाहर जाकर बस गए। हालांकि परिवार के सदस्य समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते-जाते रहे हैं।
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हरीश के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।
हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।