एक होनहार छात्र से बिस्तर पर पड़े मरीज और फिर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तक हरीश राणा की जिंदगी का सफर पिछले 13 वर्षों में कई दर्दनाक मोड़ों से गुजरा है। जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी कर वह इंजीनियर बनेंगे और अपने सपनों को साकार करेंगे। इसी बीच 21 अगस्त 2013 की रात एक हादसे ने उनकी दुनिया ही बदल दी।