सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि असाध्य कष्ट से गुजर रहे परिवारों के लिए फैसला उम्मीदों भरा है। सर्वोच्च न्यायालय के मानवीय निर्देशों के लिए हम आभारी हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के मानवीय निर्देशों के लिए हरीश के पिता अशोक राणा ने आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह फैसला सिर्फ उनके बेटे के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए उम्मीद है, जो ऐसे असाध्य कष्ट से गुजर रहे हैं। उनके लिए यह राहत की तरह है, जहां उपचार संभव नहीं रह जाता और केवल आरामदेह देखभाल की जरूरत होती है।
बुधवार को मीडिया से बातचीत में अशोक राणा ने बताया कि यह आदेश तब आया जब हरीश की स्थिति असाध्य और लाइलाज हो गई। सर्वोच्च न्यायालय ने हरीश को दिए जा रहे जीवनरक्षक उपचार को बंद करने और इसके बाद उपशामक व आरामदेह देखभाल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के लिए वह लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
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हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अशोक राणा भावुक होकर बोले, 'कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। यह सिर्फ मेरे बेटे की बात नहीं है, देश में ऐसे न जाने कितने बच्चे हैं।' इतना कहते-कहते उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता अपने बच्चों को इस हालत में देखते हैं, उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हम चाहते हैं कि सबका भला हो।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए बेहद कठिन है, लेकिन वे हरीश के सर्वोत्तम हित में निर्णय चाहते हैं। साथ ही उम्मीद जताई कि न्यायालय के इस आदेश से भविष्य में ऐसे अन्य परिवारों को भी मानवीय व्यवहार और सहानुभूति के साथ राहत मिल सकेगी।
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हरीश के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत के आदेश लागू करने में लापरवाही का आरोप
अशोक राणा ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार अदालत के आदेश के बाद भी उन्हें लागू करने में लापरवाही की जाती है। इससे आम लोगों को परेशान होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अदालत आदेश करती है, लेकिन प्रदेश सरकार लागू नहीं कराती। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने फिजियोथेरेपिस्ट और नर्स की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था, लेकिन वह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह भी बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ के सीएमओ व डॉक्टरों की टीम ने जांच की बात कही थी, लेकिन उन्होंने एम्स के डॉक्टरों के पैनल से ही जांच कराने की मांग की थी।
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बेटे हरीश के साथ मां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फीडिंग ट्यूब से दिया जा रहा जीवनरक्षक उपचार
हरीश को वर्तमान में परक्यूटेनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी) ट्यूब के माध्यम से जीवनरक्षक उपचार दिया जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। उन्हें उपशामक व आरामदेह देखभाल दी जाएगी, ताकि प्रकृति अपना कार्य कर सके। इसके लिए हरीश को दिल्ली स्थित एम्स ले जाया जाएगा।
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बेटे हरीश के साथ पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हौसले और हिम्मत की मिसाल है अशोक राणा व उनका परिवार
सुप्रीम कोर्ट से राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी में रहने वाले हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी मिलने के बाद सोसायटी के लोग भावुक और निशब्द हैं। उनका कहना है कि जब इस बारे में सोशल मीडिया और फिर सोसायटी के ग्रुप के जरिये जानकारी मिली तो समझ ही नहीं आया कि क्या प्रतिक्रिया दें। लोगों का कहना है कि माता-पिता ने अपने बेटे के लिए जिस तरह वर्षों तक संघर्ष किया, वह असाधारण है। यह फैसला कितना कठिन रहा होगा, इसका दर्द वही समझ सकते हैं। इस विकट परिस्थिति में सोसायटी के लोग हरीश के पिता अशोक राणा और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घर बेचा, फिर भी मदद नहीं मिली
बेटे के बेहतर इलाज के लिए वर्ष 2021 में पिता अशोक ने दिल्ली का तीन मंजिला मकान बेच दिया और राजनगर एक्सटेंशन की एंपायर सोसायटी में एक छोटे से फ्लैट में रहने लगे। ताकि इलाज के खर्चों को पूरा किया जा सके। हालांकि, यह कदम भी बेटे के लिए सार्थक नहीं हुआ। घर बिकने के बावजूद आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। परिवार की जिंदगी से संघर्ष और दर्द समाप्त होने के बजाय, अब और भी बढ़ गया है। हरीश के पिता अशोक राणा कहते हैं हमने बेटे के इलाज पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन अब लगता है कि हार गए।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हर महीने खर्च हो रहे 50 हजार रुपये
हरीश के इलाज में हर महीने 40 हजार से 50 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा एक नर्स की सेवा के लिए 27 हजार रुपये और खर्च करने पड़ते हैं। परिवार के लिए घर का खर्च और इलाज की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती बन गई थी।
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हरीश राणा और उसके पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
3,500 रुपये मिल रही पेंशन
हरीश के 63 वर्षीय पिता अशोक राणा की पेंशन मात्र 3,500 रुपये प्रति माह है। उनके छोटे भाई आशीष निजी कंपनी में नौकरी करते हैं, लेकिन परिवार की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर होती गई कि इलाज का खर्च पूरा करना असंभव होता गया।
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हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटे को मिले चैन की अनंत नींद
अब हरीश का इलाज लगभग खत्म हो चुका है। परिवार इस दर्दनाक समय से जूझते हुए अंतिम समय की ओर बढ़ रहा है। उनके माता-पिता का मन केवल एक चीज पर केंद्रित है बेटे को चैन की नींद सुलाना। उनका संघर्ष अब दुखभरी कहानी बन चुका है, जिसे केवल वे ही समझ सकते हैं, जो ऐसे संघर्षों से गुजरते हैं। अशोक राणा कहते हैं कि हम अब भगवान से बस यही प्रार्थना करते हैं कि बेटे को इस दर्द से मुक्ति मिले।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता का अपार संघर्ष और प्यार
हरीश राणा के माता-पिता ने यह सफर बिना किसी सहारे के तय किया। इस संघर्ष ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को तोड़ डाला, बल्कि उनके जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया। इस दर्दनाक यात्रा के बावजूद एक पिता की उम्मीद और संकल्प आज भी जीवित है कि अपने बेटे के लिए एक आखिरी सलाम।
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हरीश राणा का फ्लैट
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मदद लेने से भी किया इनकार
सोसायटी निवासी तेजश चतुर्वेदी बताते हैं कि उनका अशोक राणा और उनके परिवार से करीब चार साल पुराना परिचय है। अशोक राणा जब भी मिलते हैं, हमेशा गर्मजोशी से बात करते हैं। उन्होंने कभी अपने चेहरे पर संघर्ष का दर्द जाहिर नहीं होने दिया। बेटे हरीश के लिए जो किया, वह हर किसी के बस की बात नहीं है। सोसायटी के लोगों ने उनकी मदद के लिए आगे आने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से किसी की आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया। तेजश कहते हैं कि उनके हौसले को देखकर हम सभी हैरान रह जाते हैं।
सैंडविच देकर कहते, बिटिया को दे देना
सोसायटी निवासी अनिल चौहान कहते हैं कि अशोक राणा और उनका परिवार हौसले की मिसाल है। वह अक्सर उनसे मिलते हैं और हरीश के बारे में बात करते हुए भी उनकी हिम्मत दिखाई देती है। अनिल बताते हैं कि अशोक राणा बहुत अच्छा खाना बनाते हैं। कई बार मिलते समय वह सैंडविच देकर कहते हैं कि इसे बिटिया को दे देना। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद पूरी सोसायटी उनके साथ खड़ी है और हर कदम पर उनका साथ देगी।