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हापुड़ में पहले भी सामने आते रहे हैं आतंकी कनेक्शन, अबकी जिले को बदनुमा दाग दे गया एक फौजी

Sat, 09 Jan 2021 10:02 AM IST
पूजा त्रिपाठी नितिन दीक्षित, अमर उजाला, हापुड़

सार

-पिलखुवा निवासी टुंडा, वैट निवासी साकिब ने जिले को कर रखा है बदनाम
-जिले में देशविरोधी गतिविधियां उजागर होने से जिला प्रशासन भी सतर्क 
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terrorist - फोटो : सांकेतिक चित्र
अब्दुल करीम टुंडा, डेविड हेडली के साथी तहव्वुर राणा जैसे मोस्ट वांडेट आतंकियों से रिश्ते, सेटेलाइट फोन की दो बार लोकेशन मिलने के लिए बदनाम रहे हापुड़ जिले को एक बार फिर एक फौजी ने बदनुमा दाग दे दिया। जिले में एक बार फिर आतंकी कनेक्शन सामने आने से जिले के लोग सकते हैं। यूपी एटीएस की टीमों द्वारा शुक्रवार को जिले में की गयी कार्रवाई ने जिले पर नई कालिख के साथ पुरानी कड़वी यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
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सौरभ शर्मा - फोटो : अमर उजाला
जिला इससे पहले भी आतंकी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। पिलखवु के मोहल्ला अशोक नगरर के लोगों को 19 जनवरी 1994 की वह सर्द रात आज भी याद है जब रात के सन्नाटे को चीरती हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ियां मोहल्ले में पहुंची थी। बाद में पता चला कि यह टीम लश्कर ए तैयबा के दुर्दांत आतंकी अब्दुल करीब टुंडा की तलाश में आई थी, जो यहां का निवासी था। मासूली मारपीट और तमंचा रखने के आरोप में 1968 में पिलखुवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद टुंडा अचानक गायब हो गया था। यह पहला मामला था जब किसी आतंकी का जिले से रिश्ता सामने आया था। हापुड़ के दामन पर यह पहला दाग था।
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सौरभ शर्मा - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद हापुड़ में इस प्रकार की गतिविधियां समय दर सामने आती गईं। 28 नवंबर 2011 की शाम 7.28 बजे पाकिस्तान के बार्डर पर सेना के आईटी विशेषज्ञों ने एक सेटेलाइट फोन को ट्रेस किया था। बड़ी बात थी कि इसकी लोकेशन हापुड़ मुख्यालय से साउथ ईस्ट दिशा में 19 किलोमीटर दूर मिली थी। इस फोन से कुल 8 मिनट 44 सेकेंड बात की गयी। अगले दिन इसकी लोकेशन आगरा में मिली थी। इसके बाद जिले में खुफियां एजेंसियों ने खोजबीन की थी।

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सौरभ शर्मा के गांव का हाल - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा 14 जनवरी 2012 को भी सेटेलाइट फोन की लोकेशन बुलंदशहर, हापुड़ और मेरठ के रास्ते पर मिली थी। इसके बाद लश्कर ए तैयबा के अमेरिका निवासी आतंकी डेविड हेडली की वर्ष 2013 में गिरफ्तारी के बाद उसने इस बात का खुलासा कर सबको चौंका दिया था, उसका साथी तहव्वुर राणा अपनी बीवी समराज राणा के साथ 13 नवंबर 2008 को पहले मेरठ के शकूर नगर और इसके बाद हापुड़ के मोहल्ला मजीदपुरा आकर रुका था। 
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सौरभ शर्मा का परिवार - फोटो : अमर उजाला
26 दिसंबर 2020 को भी वैट में टैरर फेंडिंग के मामले में मदरसे से साकिब को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 30 अप्रैल 2001 को पाकिस्तान से ट्रेंड एक आतंकी को हापुड़ के मदरसे से पकड़ा गया। 22 मार्च 2002 को भी हापुड़ से लश्कर-ए-तैयबा के चार आतंकी पकड़े गए थे। कुल मिलाकर हापुड़ जिले का आतंकियों के पुराना कनेक्शन रहा है। एक और मामला सामने आने के बाद जिला खुफिया एजेंसियों के रडार पर तो है ही, लोगों में भी दहशत का माहौल है। जिले का पुलिस प्रशासन भी इसे लेकर सतरकि हो गया है। एएसपी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि जिले में पहले भी सतर्कता बरती गई हैं। ऐसे मामलों पर नजर बनाए रखने के लिए और सतर्कता बरती जाएगी। 
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