पुलिस को मिले सुसाइड नोट में तीन बहनों की मौत का कारण चार हॉरर गेम्स बताए गए हैं। ये किशोरियां गेमप्ले देखकर इनसे जुड़ी थीं। मनोचिकित्सक ने ऐसे गेम्स को बच्चों के लिए खतरनाक बताया है।
पुलिस को घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में तीनों बहनों की पसंद में शामिल चार हॉरर गेम की जानकारी सामने आई है। ये गेम खतरनाक टास्क वाले होते हैं। इनमें बेबी एन येलो, पॉपी प्लेटाइम, आई स्क्रीम और इविल नन शामिल हैं। इन गेम में डर, हिंसा समेत अन्य आयामों से होकर गुजरना होता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि किशोरियां यू-ट्यूब के गेम प्ले देखकर इनसे जुड़ी थीं।
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Ghaziabad Sisters Suicide
- फोटो : अमर उजाला
हॉरर गेम बच्चों को बना देते हैं हिंसक
वरिष्ठ मनोचिकित्सक आर. चंद्रा ने बताया कि इस प्रकार के गेम से बच्चों को दूर रखना चाहिए। इनको खेलने वाले बच्चों का गुस्सा बढ़ जाता है। वह जो चाहते हैं, उसे करने से रोकने पर हिंसक हो जाते हैं। कई बच्चे अप्रत्याशित कदम उठा लेते हैं। ये गेम उन्हें परिवार से दूर कर अवसाद की ओर ले जा सकते हैं।
री-क्रिएट किया क्राइम सीन
गुरुवार को जब पुलिस टीम चेतन कुमार के घर पहुंची तो पूछताछ के बाद घटनास्थल पर हादसे को री-क्रिएट भी किया। पूजा के कमरे में जाकर खिड़की खोली और नीचे प्लास्टिक का स्टूल रखा। इसके बाद खिड़की खोली। यह देखा गया कि खिड़की से एक साथ दो लोग कूद सकते हैं या नहीं। इसमें तकनीकी तौर पर एक साथ दो लोगों के कूदने की पुष्टि नहीं हुई। वहीं, पुलिस को रात 2:03 बजे की एक सीसीटीवी फुटेज मिली है। इसमें हादसे के बाद चेतन कुमार, उनकी पत्नी सुजाता, हिना और टीना नीचे जाती दिखाई दी हैं।
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इसी सोसायटी में तीन किशोरियों ने की खुदकुशी
- फोटो : पीटीआई
सोसाइटी में डर का माहौल
भारत सिटी सोसायटी में मंगलवार देर रात हुए हादसे के बाद से डर का माहौल है। स्थिति यह है कि बी-1 टॉवर की नौवीं मंजिल पर रहने वाले परिवार यहां से फ्लैट बदलने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए लगातार प्रॉपर्टी डीलर से संपर्क कर रहे हैं। आत्महत्या करने वाली किशोरियों का परिवार टॉवर की इसी मंजिल पर रहता है।
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गाजियाबाद खुदकुशी मामला
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के दूसरे दिन गुरुवार को अमर उजाला की टीम यहां पहुंची तो दिनभर चहल-पहल वाली सोसायटी में अजीब सा सन्नाटा पसरा मिला। सोसायटी के बीच बने जिस पार्क में आमतौर पर बच्चों की भीड़ रहती है, वहां एक-दो बेंच पर कुछ बुजुर्ग व महिलाएं ही बैठी दिखीं। सभी के चेहरे पर सवाल और जिज्ञासा तैर रही थी। दबी जुबान में हादसे की चर्चा भी हो रही थी।
सोसायटी के सह सचिव राहुल झा ने बताया कि हादसे के बाद से बच्चे बेहद डरे हुए हैं। पहले स्कूल से लौटने के बाद और शाम के समय पार्क में बच्चे खेलने-कूदने आते थे। यहां माता-पिता और सोसायटी के अन्य लोगों के साथ समय बिताते थे। हादसे के बाद से यह सब बंद हो गया है। बच्चों ने पार्क की तरफ आना बंद कर दिया है।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : पीटीआई
सोसायटी के मनोज ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करते हैं। चेतन कुमार के फ्लोर पर रहने वाले कुछ परिवारों ने उनसे संपर्क किया है। उनका कहना है कि हादसे के बाद से बच्चे इतना डर गए हैं कि घर से बाहर ही नहीं निकल रहे। इस कारण कई परिवार, जो यहां किराये पर रहते हैं, अपना फ्लैट बदलना चाहते हैं।
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भारत सिटी सोसायटी के फ्लैट में कमरे की दीवार पर किशोरी ने लिखी लाइन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरी ओर कुछ लोग स्थिति को सामान्य करने में भी लगे हुए हैं। एओए पदाधिकारी लोगों से अपील कर रहे हैं कि घर में भय का माहौल न बनाएं। बच्चों को सकारात्मक रखें। एओए के व्हाट्सएप ग्रुप पर कई लोगों ने हादसे को भूलने की भी अपील की और इससे बच्चों को दूर रखने की सलाह दी।
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Ghaziabad Sisters Suicide
- फोटो : अमर उजाला
पिता बोले- सब मेरी गलती, मैंने बच्चों पर ध्यान नहीं दिया
तीनों बहनों के पिता चेतन कुमार ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, उनकी गलती रही कि बेटियों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया। उन्हें मोबाइल फोन दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां कोरियन कल्चर से बहुत अधिक प्रभावित हो गई थीं।
मांग की कि भारत में कोरियन ड्रामा, सीरियल, वीडियो सभी बंद होने चाहिए। कहा कि उन्होंने अपने तीन बच्चों को खोया है, कोई और इस कल्चर की वजह से अपना बच्चा न गंवाएं। इसके लिए भारत सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए।