दरोगा के परिजन बिलखते हुए
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शाम के समय विश्वनाथ पहुंच गया। उसने तमंचा लेकर मजदूरों को धमकाना शुरू कर दिया। शिवनाथ ने पुलिस को सूचना दी। शाम तकरीबन सात बजे दरोगा प्रशांत कुमार और सिपाही चंद्रसेन बाइक से गांव पहुंचे। खेत में विश्वनाथ के हाथ में तमंचा देखकर पीछे दौड़ लग दी। वह भागने लगा। मगर, दरोगा और सिपाही पीछा करते रहे। विश्वनाथ ने गोली चला दी, जोकि दरोगा की गर्दन में लग गई। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपी भाग गया। घटना के बाद ग्रामीण भी भाग निकले। चंद्रसेन की सूचना पर थाना की फोर्स पहुंची। दरोगा को अस्पताल लेकर गई, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।