गाजियाबाद के मोदीनगर में किराये के मकान में रहने वाले छात्र अंकित खोखर की हत्या का आरोपी उमेश 12वीं पास है। वह लंबे समय हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के पास कंपाउडंर रहा है। उसने शातिर दिमाग से ऐसी साजिश रची कि एक बार तो पुलिस के अफसर ही गच्चा खा गए। उसने कहा कि अंकित तनाव में था और कहीं चला गया है। पुलिस ने अंकित के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई तो यह अलग-अलग जगह की मिली। खाते के बारे में जानकारी की तो उससे रकम लगातार निकाली जा रही थी। इससे लगा कि उमेश सच बोल रहा है। अगर अंकित के दोस्त दावे के साथ न कहते कि उसके साथ कुछ अनहोनी हुई है तो हत्या का राज खुल अभी पाना मुश्किल था।
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मृतक अंकित खोखर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दोस्तों ने कहा कि उमेश ठीक से बात ही नहीं कर रहा है। उसने अंकित का कमरा खोलकर दिखाने से भी मना कर दिया। इससे उस पर शक और गहरा गया। दोस्तों ने पुलिस को यह भी बताया कि अंकित उनसे रोज बात करता था।
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आरोपी उमेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
छह अक्तूबर के बाद उसका फोन नहीं उठ रहा, ऐसा कैसे हो सकता है। फोन पर घंटी जाती है, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होती जबकि उसका व्हाट्सएप पर चल रहा है। दोस्तों ने व्हाट्सएप पर चैटिंग के दौरान कुछ गलत जानकारी डाली। उमेश को इसका पता नहीं था। उसने इसे सही जानकर जवाब दे दिया।
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आरोपी उमेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
इस पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उमेश ने बताया कि उसे लगा कि अंकित की हत्या हो जाएगी तो किसी को पता नहीं चलेगा क्योंकि उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। परिवार में किसी और से उसका बहुत संपर्क नहीं था। उसे नहीं मालूम था कि दोस्त इस तरह अड़ जाएंगे और पुलिस के पास पहुंचेंगे।
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मृतक अंकित खोखर का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, उसने इसके आगे की भी सोच रखी थी। अगर पुलिस को पता चला तो क्या करना है, यह साजिश में पहले से शामिल था। उसने उमेश के कपड़े जला दिए थे। शव के टुकड़े फेंकने के लिए वह दोस्त की गाड़ी मांगकर लाया था।
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इसी मकान में किराये पर रहता था अंकित
- फोटो : अमर उजाला
अपना मोबाइल घर छोड़ अंकित का ले गया
उमेश ने साजिश में दोस्त प्रवेश को शामिल किया। उससे कहा कि अंकित के मोबाइल का इस्तेमाल इस तरह करना है कि पुलिस इसकी डिटेल निकाले तो लगे कि अंकित जीवित है। इसी के तहत उसने प्रवेश को अंकित का मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड दिया। इससे पैसा उत्तराखंड से निकलवाया।
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अंकित खोखर के दोस्त
- फोटो : अमर उजाला
उसने एक दिसंबर को हरिद्वार से 40 हजार रुपये निकाले। इसके बाद दो दिसंबर को ऋषिकेश से दो बार में 40-40 हजार रुपये निकाले। उसका कहना था कि ऐसा इसलिए किया ताकि पुलिस को लगे कि अंकित उत्तराखंड में घूम रहा है और जरूरत पड़ने पर रकम निकाल रहा है ।
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मसूरी गंगनहर में फेंके गए अंकित के शव के टुकड़े
- फोटो : अमर उजाला
खाते की डिटेल ने खोल दी पोल
इस पूरी साजिश से पर्दा तब उठा जब पुलिस को पता चला कि उमेश के खाते में एक करोड़ थे। ये जानकारी दोस्तों ने दी। यह रकम केनरा बैंक और पीएनबी की शाखाओं में दी। पुलिस ने इनकी डिटेल निकलवाई तो पता चला कि एक करोड़ में से 60 लाख से ज्यादा निकाले जा चुके हैं।
इनमें से 40 लाख छह अक्तूबर से पहले और 21 लाख से ज्यादा इसके बाद निकाले गए। इनमें से 60 लाख रुपये उमेश के खाते में गए थे। इसी से पुलिस को यकीन हो गया कि उसने हत्या की है। सख्ती से पूछताछ में वह टूट गया।