एनजीटी के दिल्ली एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध के आदेश का असर गाजियाबाद में देखने को नहीं मिला। दिवाली पर गाजियाबाद में जमकर पटाखे जले। आसमान मे धुएं की चादर बिछ गई। नतीजा ये हुआ कि शहर का एक्यूआई बढ़कर 448 पर पहुंच गया। जो मानकों से साढ़े चार गुना अधिक था। पिछले चार वर्षों में इस बार दिवाली के अगले दिन शहर का एक्यूआई सबसे अधिक रहा।
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दिवाली की रात जले पटाखे
- फोटो : अमर उजाला
दिवाली की रात पीएम दस और पीएम 2.5 का स्तर मानकों से कई गुना अधिक रहा। सीपीसीबी के आंकड़े देखे जाएं तो पीएम दस का स्तर करीब 9 गुना तो पीएम 2.5 का स्तर 15 गुना अधिक दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार गाजियाबाद देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। देश का सबसे प्रदूषित शहर जींद रहा। यहां पर एक्यूआई 457 दर्ज किया गया।
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दिवाली पर जलाए गए पटाखों का कचरा
- फोटो : अमर उजाला
इस बार एनजीटी ने दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद भी गाजियाबाद शहर में जमकर पटाखे जले। रात 9 बजे के बाद शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक चली। इसके चलते रात करीब 10:30 बजे आसमान में पटाखों का धुआं छा गया। सीपीसीबी के आंकड़ों की मानें तो आतिशबाजी से शनिवार को पीएम-10 का स्तर करीब 9 गुना तो पीएम 2.5 का स्तर करीब 15 गुना अधिक तक जा पहुंचा।
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दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण
- फोटो : ANI
पटाखे जलने शुरू हुए तो पीएम दस और पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने लगा। जो रात करीब 10 से 12 बजे तक अधिकतम पर जा पहुंचा। इंदिरापुरम इलाके में दिवाली की रात पीएम 10 का स्तर 961 तक जा पहुंचा, जबकि पीएम 2.5 का स्तर 686 तक गया। लोनी में पीएम दस 922 और पीएम 2.5 का स्तर 890 दर्ज किया गया। वहीं, संजय नगर में पीएम दस और पीएम 2.5 का स्तर 930 और 861 दर्ज किया गया। वसुंधरा में पीएम दस का स्तर 870 जबकि पीएम 2.5 का स्तर 808 रहा।
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दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण
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सीपीसीबी के आंकड़े देखे जाएं तो पिछले वर्ष के मुकाबले दिवाली के अगले दिन शहर का एक्यूआई ज्यादा रहा। पिछले वर्ष दिवाली के अगले दिन शहर का एक्यूआई 393 था जबकि इस वर्ष 448 दर्ज किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि लोगों ने जमकर पटाखे जलाए। जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हालांकि रविवार शाम को हुई बारिश ने प्रदूषण के स्तर को कम कर दिया। जिससे लोगों को राहत मिली।
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मॉर्निंग वॉक करने निकले लोग
- फोटो : ANI
बारिश के बाद लुढ़का एक्यूआई
सीपीसीबी के आंकड़े देखे जाएं तो सुबह के समय शहर का एक्यूआई 498 तक पहुंच गया था। नौ बजे करीब संजय नगर का एक्यूआई 490 दर्ज किया गया। वसुंधरा का एक्यूआई 473 और इंदिरापुरम का एक्यूआई 478 दर्ज किया गया था। हालांकि दिन में तेज हवाओं ने शहर के प्रदूषण स्तर को कम कर दिया। जिसके बाद शाम छह बजे तक एक्यूआई में काफी कमी देखी गई। छह बजे के बाद लोनी का एक्यूआई 465, इंदिरापुरम 433, वसुंधरा 413 और संजय नगर का एक्यूआई 453 दर्ज किया गया। अधिकारियों की मानें तो आने वाले दिनों में हवा चलती रही तो प्रदूषण से लोगों को राहत मिल सकती है।
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आसमान छाई रही धुंध
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रात में कई घंटे नहीं दर्ज किया गया डाटा
सीपीसीबी की साइट में मौजूद आंकड़ों में कई घंटे का डाटा गायब है। इंदिरापुरम में रात करीब 12 बजे से चार बजे, संजय नगर में भी रात एक से सुबह पांच बजे और वसुंधरा में रात एक से सुबह चार बजे तक पीएम दस और पीएम 2.5 के आंकड़े नहीं हैं। अधिकारियों की मानें तो तकनीकी दिक्कत की वजह से ऐसा हुआ है।
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pollution in delhi ncr
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सांस रोगियों को हुई दिक्कत
रात में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से आसमान में धुंध छा गई। इसकी वजह से सांस के रोगियों की मुसीबत बढ़ गई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें इनहेलर का सहारा लेना पड़ा। अस्पताल में भी कुछ मरीज पहुंचे, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। यहीं नहीं रात में घरों में लोगों को घुटन महसूस हुई। सर्दी होने के बाद भी लोगों को घरों में एसी चलाने पड़े।
बाहर निकलने पर लोगों को आंखों में जलन भी महसूस हुई। श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. केके पांडेय ने बताया कि पटाखों का धुआं सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है। यह सांस के साथ शरीर में जाकर फेफड़ों में जम जाता है जिससे अस्थमा, ब्रोनकाइटिस आदि बीमारी का कारण बन सकता है।