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ये हैं वो 5 कारण, क्यों केजरीवाल ने विश्वास और आशुतोष की जगह बाहरी को दिया राज्य सभा टिकट

Fri, 05 Jan 2018 05:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुमार विश्वास आशुतोष के साथ - फोटो : Getty Image
आम आदमी पार्टी ने तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए बुधवार को दिल्ली के व्यापारी सुशील गुप्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट एनडी गुप्ता सहित संजय सिंह को राज्य सभा के लिए टिकट दे दिया। इसके बाद से ही पार्टी के अंदर और बाहर सुशील गुप्ता और एनडी गुप्ता की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह आरोप तक लगाया गया कि पार्टी ने 100 करोड़ रुपये ले कर राज्य सभा टिकट की सीटें बेच दी हैं। जबकि पार्टी ने ये फैसला क्यों किया इसके पीछे ये पांच कारण बताए जा रहे हैं...
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(1) सुशील गुप्ता का हरियाणा में मजबूत नेटवर्क है। हरियाणा के 14 जिलों में उनकी संस्थाएं काम कर रही है। उनका कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में हरियाणा के लिये पार्टी ने इस नाम को बेहतर माना। नेटवर्क के अलावा हरियाणा के 15 फीसदी वैश्य मतदाताओं को आप से जोड़ने में यह मददगार हो सकते हैं। लिहाजा गुप्ता के नाम पर मुहर लगा दी गयी। 
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(2) चार्टर्ड अकाउटेंट एनडी गुप्ता के बारे में माना जाता है कि उन्होंने पार्टी के लिए चंदें में आने वाली रकम को न सिर्फ बढ़ाने में मदद की बल्कि, उसे कैसे मैनेज किया जाए ताकि आयकर विभाग के शिकंजे से बचा जा सके इसमें भी तकीनकी और कानूनी मदद की है। पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की इतनी बड़ी मदद करने वाले को पार्टी अनदेखा नहीं कर सकती थी। वैसे भी आमतौर पर यह धारणा है कि कोई भी राजनीतिक दल राज्य सभा में ऐसे ही लोगों को भेजता है जो पार्टी के लिए पर्दे के पीछे रह कर काम करते हैं। आमतौर पर लोकप्रिय और चर्चित लोगों को लोकसभा के जरिए ही एंट्री कराई जाती है।

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(3) सूत्र बताते हैं कि राज्य सभा टिकट पाने की होड़ के चलते आम आदमी पार्टी के अंदर ही गुटबाजी शुरु हो गई थी। पार्टी फोरम पर हर नेता को टिकट दिलाने के लिये कुछ लोग खड़े हो जाते। एकबारगी लगा कि हर नेता दूसरे को काट रहा है। इस मसले पर जबरस्त घमासान मचता देख पार्टी ने किसी भी विवादित नाम को लेने की जगह ऐसे दो नाम चुने जिसके पक्ष में भले ही कम लोग हों लेकिन, गुटबाजी न हो।
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(4) कुमार विश्वास को टिकट न दिए जाने पर सबसे ज्यादा विवाद हो रहा है ज‌बकि मीडिया में अपनी मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ आप में आए पूर्व पत्रकार आशुतोष को भी राज्य सभा का टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद आशुतोष ने पार्टी के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और संजय सिंह के साथ नॉमिनेशन फाइल करने के लिए होने वाली रैली में भी शामिल हुए। जबकि कुमार विश्वास ने सार्वजनिक तौर पर इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया।
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कुमार विश्वास - फोटो : self
(5) कवि से नेता बने कुमार विश्वास को टिकट न दिए जाने पर सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं जबकि सूत्रों की मानें तो पार्टी के अंदर सबसे ज्यादा विरोध कुमार विश्वास के नाम पर ही था। पार्टी में कुमार विश्वास के अलावा बाकी आठ नामों आशुतोष, पंकज गुप्ता, आतिशी मरलेना, राघव चड्ढा, दिलीप पांडेय, दीपक वाजपेयी, आशीष तलवार व आशीष खेतान को भी आगे बढ़ाया था लेकिन किसी पर भी एकराय नहीं बन सकी। 

बता दें कि दिल्ली में राज्यसभा के लिए 16 जनवरी को चुनाव होना है। चूंकि दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पास 70 में से 67 सीटें हैं ऐसे में उसके उम्मीदवारों का निर्विरोध चुनाव लगभग तय है।
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