द्वारका अग्निकांड
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न आपात निकास, न उपकरण, सिर्फ वादे
इस त्रासदी में सोसाइटी का प्रबंधन भी पीछे नहीं रहा। आरोप है कि आग लगते ही लिफ्ट बंद कर दी गई। सुरक्षा के नाम पर फ्लोर दर फ्लोर दौड़ लगाते निवासियों ने जब बाहर निकलने का रास्ता खोजा, तो पाया कि आपातकालीन निकास केवल प्लानिंग के कागजों तक सीमित था। अग्निशमन यंत्र तो थे, मगर दिखावे के लिए। निवासियों ने बताया कि मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने 3600 रुपये लिए जाते हैं, लेकिन व्यवस्था चौपट है। एक शख्स ने बताया कि आग लगने के बाद मेंटीनेंस को जब फोन किया गया तो उन लोगों ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई।