पंजाबी बाग हादसे में जान गंवाने वाले संचित व रितू के परिजनों ने उनके नेत्रदान कर दिया है। दुख की घड़ी में परिवार वालों के लिए यह निर्णय लेने कठिन था लेकिन परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर यह फैसला लिया।
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रितू के पिता मलखान सिंह इस बात के लिए राजी नहीं थे लेकिन साढू ललित ने उन्हें समझाया कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है मगर उसकी आंखों से कोई दुनिया देख सकेगा। उसके बाद उन्होंने भी हामी भर दी।
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वहीं संचित के पिता राजकुमार ने अपने बेटे के लिए यह फैसला लिया। राजकुमार ने बताया कि उन्होंने सपने में नहीं सोचा था कि उनका बेटा उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला जाएगा।
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लेकिन उन्हें इस बात का एहसास होता रहेगा कि अपनी आंखों के जरिये वह सब कुछ देख रहा है। दोनों परिवारों की सहमति से संचित और रितू की आंखों को दान कर दिया गया। एम्स की ऑर्बो (ऑर्गन रिट्रिवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन) की टीम ने दोनों की रेटिना को संरक्षण किया।
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और भी भयावह हो सकती थी घटना
पंजाबी बाग में जिस फ्लाईओवर से कार नीचे गिरी। उसके नीचे से रेलवे लाइन गुजरती है। इलेक्ट्रिक लाइन होने की वजह से वहां से हाई वोल्टेज तार गुजर रही है। कार करीब 40 फुट नीचे जिस जगह पर गिरी वह जगह खाली थी। अगर यह कार हाईवोल्टज तार पर गिरती तो हादसा और भयावह हो सकता था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसा से कुछ देर पहले ही इस लाइन से तमिलनाडू एक्सप्रेस ट्रेन गुजरी थी। लोगों के मुताबिक यहां से गुजरने के दौरान ट्रेन की रफ्तार काफी तेज रहती है। जिस दौरान हादसा हुआ वहां से एक और ट्रेन गुजर रही थी। उसके चालक ने हादसा देखकर ट्रेन को पहले ही रोक दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रेन के चालक ने ट्रेन से ही घायलों को अगले स्टेशन तक छोड़ने की बात कही तब तक पुलिस मौके पर पहुंच गई और फौरन घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।