ये कैसा उतावलापन है जो दो हफ्ते से जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को कभी जिंदा चूहे मुंह में रखने तो कभी मरा हुआ सांप मुंह में रखने को मजबूर कर रहा है। आखिर ऐसी कौन सी चीज है जो इन किसानों वो काम करने को मजबूर कर रही है जो हम और आप सोच कर ही सिहर उठ सकते हैं।
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अपने घर तमिलनाडु से दो हफ्ते पहले यह सोचकर निकले थे कि वहां की सरकार ने नहीं सुना तो केंद्र में बैठी मोदी सरकार तो जरूर सुनेगी। लेकिन यहां भी केंद्र सरकार को इनकी चिंता नहीं है। और यही इन किसानों के उतावलेपन की वजह है।
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बुधवार को तमिलनाडु के इन किसानों ने मरे सांप को अपने मुंह में रखकर प्रदर्शन किया कि काश सरकार अब अपनी नींद से जाग जाए और इनकी गुहार सुन ले।
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बता दें कि कर्ज और सूखे से परेशान 270 किसान अक्टूबर से अब तक आत्महत्या कर चुके हैं या अन्य वजहों से उनकी मौत हो गई। गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से किसानों की ऋण माफी के लिए 39000 करोड़ रुपए के राहत कोष की मांग की है। लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते मात्र 2014 करोड़ रुपए की राहत राशि ही अप्रूव की है।
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तमिलनाडु में सूखे की बड़ी वजह ये रही कि उत्तर-पूर्वी मॉनसून जिससे वहां सबसे ज्यादा बारिश होती है वो अक्टूबर से दिसंबर के बीच हुई ही नहीं।
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यह पिछली सदी में हुई सबसे कम बारिश रही और राज्य में सिर्फ 166 मिमी बारिश हुई जबकि जरूरत होती है कम से कम 437 मिमी की।
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इसी वजह से सर्दी में होने वाली साम्बा फसल भी नहीं हुई।
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हालांकि इस दौरान प्रदेश की मुख्यमंत्री जयललिता की मौत ने सारा राजनीतिक ध्यान उस ओर ही खींच रखा था। जनवरी में जलीकट्टू बैन को लेकर हंगामा रहा और किसानों की दयनीय स्थिति पर किसी का ध्यान नहीं गया।
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फर्स्टपोस्ट में छपे एक लेख के अनुसार गैर अधिकारिक आंकड़ों में अब तक सूखे के कारण मरने वाले किसानों की संख्या 100 से भी ज्यादा है।
हालांकि पिछले दिनों फिल्म जगत से इन किसानों को अभिनेता प्रकाश राज और विशाल का समर्थन भी मिला है। लेकिन ये लोग तब तक अपना प्रदर्शन खत्म करने को तैयार नहीं हैं जब तक राष्ट्रीय बैंक इनके लोन माफ नहीं कर देते जैसे कि जयललिता के काल में कॉपरेटिव बैंक ने नहीं किया था।