फरीदाबाद के बहुचर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में बुधवार को फैसला आ गया। आज इस मामले में सजा सुनाई जा सकती है। पांच महीने से कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने के बाद आखिर फैंसले की घड़ी आ गई लेकिन इसके बदले में परिवार का सब कुछ दांव पर लग गया। निकिता की हत्या के बाद उसके पिता मूलचंद तोमर की नौकरी छूट गई। वह परिवार की आय का एकमात्र स्त्रोत थे।
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nikita murder case
- फोटो : अमर उजाला
मूलचंद तोमर नोएडा की एक कंपनी में कार्यरत थे। भाई नवीन तोमर दिल्ली के एक इंस्टिट्यूट में यूपीएसई की तैयारी कर रहे थे। बहन की मौत के बाद नवीन ने कोचिंग छोड़ दी और बहन को इंसाफ दिलाने में ही जुट गया। परिवार के पास अब कमाई का कोई साधन नहीं बचा है।
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आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलिस
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हत्या के बाद निकिता की तेरहवीं तक नेता व सामाजिक लोग दिलासा देने आए और घोषणाएं करके चले गए। अदालत दोषियों को क्या सजा सुनाएगी ये तो शुक्रवार को ही पता लगेगा, लेकिन परिवार दोषियों को फांसी से कम सजा पर संतोष नही करना चाहता। निकिता के पिता मूलचंद तोमर ने बताया कि बेटी को वीरांगना का दर्जा दिलाने के लिए दिलाने के लिए आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
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आरोपी रेहानऔर निकिता
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'निकिता न्याय मंच' के बैनर तले बनेगी आगे की रणनीति
निकिता की हत्या का मामले में फैसला भले ही आ रहा हो, लेकिन परिवार व समाज के लोग उसे सामाजिक न्याय भी दिलाना चाहते हैं। इसके लिए 51 सदस्यीय कमेटी 'निकिता न्याय मंच' बनाई गई थी। मंच अब निकिता के मुद्दे को आगे बढ़ाकर उसे वीरांगना का दर्जा दिलाने की दिशा में काम करेगा। पिता मूलचंद का कहना है कि निकिता की हत्या के बाद मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर कानून बन गया है, लेकिन हरियाणा में इसकी शुरुआत नही हुई है। जबकि घटना हरियाणा के जिले की है।
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उन्होंने बताया कि वे निकिता के साथ हुई घटना को अन्य बेटियों के लिए एक उदाहरण बनाना चाहते हैं ताकि कोई बिटिया किसी के बहकावे में ना आए। उन्होंने बताया कि उनका परिवार छह बार केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुज्जर से मिल चुका है। इसके अलावा स्थानीय विधायक भी कई बार उन्हें आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन बात केवल आश्वासन तक ही सीमित है। ग्यारह जनवरी को उन्होंने मुख्यमंत्री से हरियाणा भवन में मिलने के समय लिया था, लेकिन किसान आंदोलन की व्यस्तता के कारण बात कैंसिल हो गई।
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उन्होंने बताया कि दिल्ली से मुरादाबाद जाने वाले हाइवे पर हापुड़ के पास सड़क पर निकिता तोमर मार्ग के बोर्ड लगा दिए गए हैं। इसके अलावा हापुड़ के निजामपुर में जल्द ही उन्हें करीब एक हजार गज सरकारी जमीन मिलने जा रही है। जिसमें निकिता तोमर पार्क बनाया जाएगा। सोहना रोड स्थित अपना घर सोसायटी के सामने निकिता तोमर मार्ग के बोर्ड लगाए गए थे, लेकिन आधिकारिक तौर पर निगम द्वारा मंजूरी ना मिलने के कारण उन्हें हटा दिया गया।
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लाइसेंस तो मिले, लेकिन हथियार खरीदने के पैसे नहीं
निकिता के भाई नवीन तोमर का कहना है कि उन्हें बंदूक का लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन परिवार के पास हथियार खरीदने के पैसे ही नहीं हैं। वह चाहते हैं कि किसी कोटे के तहत उन्हें सस्ते दाम पर हथियार दिलाया जाए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को सुरक्षा के लिए तीन पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन हर जगह उन्हें साथ ले जाना संभव नहीं है।
कोर्ट के चक्कर में बार बार कई जगह आना जाना होता है ऐसे में सब व्यवस्थित करना मुश्किल हो जाता है। दोषियों को सजा मिलने के बाद उनके घर से सुरक्षा हटा ली जाएगी। उसके बाद उन्हें अपने जोखिम पर ही जीना पड़ेगा। दोषी आपराधिक व रसूखदार परिवार से हैं ऐसे में भविष्य को लेकर भी डर सता रहा है।