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Delhi Blast: नूंह से खरीदा था फर्टिलाइजर... नोटबुक में 'ऑपरेशन' का कई बार जिक्र; उमर और मुजम्मिल की मिली डायरी

Thu, 13 Nov 2025 10:07 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद

सार

दिल्ली ब्लास्ट का मेवात कनेक्शन सामने आया है। तीन लाख का 20 क्विंटल से ज्यादा उर्वरक खरीदा गया था। वहीं, जांच एजेंसियों को डॉक्टर उमर और मुजम्मिल की डायरियां मिलीं हैं। डायरी और नोटबुक में कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है।
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Delhi Blast - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेवात के नूंह से अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए फर्टिलाइजर खरीदा गया था। स्पेशल सेल की टीम ने नूंह में छापा मारा है। वहां कई फर्टिलाइजर की दुकानों की वीडियो बनाकर जम्मू कश्मीर पुलिस को भेजा है, ताकि मुजम्मिल उस दुकान की पहचान कर सके जहां से उसने और उमर ने फर्टिलाइजर के तौर पर केमिकल लिया था। यह जानकारी भी सामने आई है कि लाल किला विस्फोट के आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये नकद जुटाए, ये रुपये उमर को सौंपे गए थे।
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डॉ. मुजम्मिल की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बाद में उन्होंने गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से IED तैयार करने के लिए तीन लाख रुपये का 20 क्विंटल से ज्यादा NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम) उर्वरक खरीदा। उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच पैसों का विवाद भी था। उमर ने सिग्नल ऐप पर 2-4 सदस्यों वाला एक ग्रुप बनाया था। जांच एजेंसी के सूत्रों ने यह खुलासा किया है।
 
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डॉ. मुजम्मिल अहमद की मां अपने बेटे का तस्वीर दिखाते हुए। - फोटो : बसित जरगर
डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल की डायरियां सुरक्षा एजेंसी के हाथ लगी हैं। जिससे अब दिल्ली धमाका के कई  सवालों के जवाब मिलने की संभावना है। यह डायरी मंगलवार और बुधवार को अलफलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस के अंदर डॉक्टर उमर के रूम नंबर चार और मुजम्मिल के रूम नंबर 13 से मिली हैं। इसके अलावा पुलिस को एक डायरी मुजम्मिल के उस कमरे से भी मिली है जहां से पुलिस ने धौज में 360 किलो विस्फोटक बरामद किया था और यह अलफलाह यूनिवर्सिटी से महज 300 मीटर की दूरी पर है।

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संदिग्ध डॉ. मोहम्मद उमर - फोटो : पीटीआई
मिली डायरी और नोटबुक में कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है, जिनका रेफरेंस आठ से 12 नवंबर के तौर पर भी आ रहा है। सूत्रों की मानें तो डायरी के अंदर ऑपरेशन शब्द का कई बार इस्तेमाल किया गया है।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 का कमरा नंबर 13
दिल्ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिले 2921 किलो विस्फोटक समेत आतंक की पूरी कहानी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रची जा रही थी। तीसरी मंजिल पर स्थित ये कमरा यहां कार्यरत डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को अलॉट था। इसके बगल वाला कमरा दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर को अलॉट था, लेकिन उमर अपना कमरा छोड़कर मुज्जमिल के साथ ही रहता था।
 
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AL-Falah University - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि दोनों बीते कई माह से काफी अच्छे दोस्त थे। वे यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकतर समय एक साथ बिताते थे और एक-दूसरे से ही चर्चाओं का दौर रखते थे। इनके कई अन्य दोस्त भी थे जो अक्सर इनके साथ देखे जाते रहे हैं। 
 
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अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 - फोटो : अमर उजाला
जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो दोनों बीते लगभग 3 महीने से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। वे अक्सर अपने हैंडलर से बात करते थे। इसके चलते दोनों ही एक कमरे में अधिकतर समय रहते थे।
 

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अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग - फोटो : अमर उजाला
यूनिवर्सिटी के सूत्र ने बताया कि सोमवार को एटीएस टीम ने लगभग 5 घंटे तक यूनिवर्सिटी परिसर में पूछताछ की। कार में सवार होकर एटीएस के कई लोगों की टीम यहां पहुंची। पहले ये सादे कपड़ों में थे और इनके साथ एक महिला भी थी। 
 

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अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग - फोटो : अमर उजाला
लगभग 2 घंटे तक इन्होंने यूनिवर्सिटी के छात्रों व स्टाफ से बातचीत करने के साथ ही पूछताछ भी की। इसमें सभी ने डॉ. मुज्जमिल और उसके साथियों के बारे में पूछा। बाद में टीम ने अपनी एटीएस की जैकेट पहनी और फिर तीसरी मंजिल पर डॉ. मुज्जमिल व उमर के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसकी तलाशी ली। 
 

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फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए जा सकती है एनआईए - फोटो : ANI
यहां टीम ने लगभग ढाई घंटे तक सामान खंगाला। इस दौरान यहां से काफी सामान टीम ने जब्त भी किया है। टीम ने यहां से जाने के दौरान भी छात्रों व स्टाफ को कहा कि पूछताछ में आप लोगों को सहयोग करना है ताकि अपराधी बच न सकें और बेकसूर लोगों को कोई परेशानी न हो।

 

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धमाके से दहली दिल्ली - फोटो : अमर उजाला
खाद उर्वरक ने कैसे दहला दी राष्ट्रीय राजधानी
आम भाषा में अमोनियम नाइट्रेट को खाद उर्वरक कहा जाता है। मगर इस उर्वरक ने कैसे दिल्ली को दहला दिया और कैसे विस्फोटक बना। यह सवाल सभी के जेहन में है। दरअसल इस उर्वरक ने इससे पहले भी तबाही मचाई है। अमेरिका में 1000 किलो अमोनियम नाइट्रेट से विस्फोट किया गया था जिसके टुकड़े धमाके के बाद आठवीं मंजिल तक गए थे। भारत में भी यूपी और महाराष्ट्र में इसका इस्तेमाल हो चुका है। 
 

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Delhi Blast - फोटो : अमर उजाला
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लालकिला बम धमाका घटनास्थल से दो तरह के केमिकल और गंध होने के सबूत मिले हैं। ऐसे में अमोनियम नाइट्रेट के साथ अन्य विस्फोटक मिलाया गया है। सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर अमोनियम नाइट्रेट होता क्या है? क्या ये बम होता है या विस्फोटक होता है? और अगर ये विस्फोटक होता है तो इतनी बड़ी मात्रा में कैसे इसको स्टॉक कर के रखा गया था। अमोनियम नाइट्रेट ये असल में एक तरह का नमक होता है। नमक की तरह ही इसके सफेद क्रिस्टल होते हैं। 

 

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Delhi Blast - फोटो : अमर उजाला
इसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर तो एक खाद के रूप में होता है। ये प्राकृतिक नहीं होता, मतलब इसको लैब में बनाया जाता है। नाइट्रेट वाले ज्यादतर केमिकल खाद के रूप में इस्तेमाल होते हैं, क्योंकि इनसे फसल को नाइट्रोजन मिलती है। हालांकि यह खुद विस्फोट करने में सक्षम नहीं है। इसमें कोई अन्य विस्फोटक पदार्थ मिलते ही यह ब्लास्ट को कई गुना घातक बना देता है। 

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Delhi Blast - फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले अमेरिका में हुआ था
अमेरिका में 1970 में विस्कॉन्सिन की यूनिवर्सिटी में वियेतनाम जंग के विरोध में एक वैन में 1000 किलो एएनएफओ से एक विस्फोट किया गया था। कहते हैं वैन के टुकड़े बिल्डिंग की आठवीं मंजिल तक उड़ कर चले गए थे। भारत में 2012 में पुणे में जंगली महाराज रोड पर कई छोटे विस्फोट हुए थे, उनमें भी एएनएफओ पाया गया था। उससे पहले मुंबई में ऑपेरा हाउस, ज़ावेरी बाज़ार और दादर में धमाकों में 26 लोगों की जान गई थी, उसमें भी एएनएफओ इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई थी।
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दिल्ली में धमाके के बाद जांच करती पुलिस टीम और सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
पूरी दुनिया में मचा चुका है तबाही
वर्ष 2020 में बेरूत में बंदरगाह पर एक गोदाम में 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट रखा हुआ था। पास में कहीं आग लगी कुछ धमाका हुआ और उस पास की आग से गोदाम में रखे अमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट हो गया। उस गोदाम में ऐसा विस्फोट हुआ था कि पूरा का पूरा बंदरगाह ही उड़ गया था। 7 किलोमीटर दूर तक इमारतें हिल गई थीं, 218 लोगों की जान चली गई थी और 7000 लोग घायल हो गए थे। यानी शांत से दिखने वाला ये नमक अगर विस्फोटक से मिल जाए तो तबाही मचाने की ताक़त रखता है।
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