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इन नकली नोटों संग गुलशन भाभी और पाकिस्तान-चीन कनेक्शन ने उड़ा दी है खुफिया एजेंसियों की नींद

Sat, 08 Jul 2017 01:28 PM IST
संजय शिशौदिया-सौरभ पांडेय/अमर उजाला, गाजियाबाद
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मुरादाबाद की गुलशन भाभी भी है चर्चित: जाली करेंसी के मामले में मुरादाबाद की गुलशन उर्फ भाभी का नाम भी काफी चर्चित है। जाली करेंसी का भाभी का कारोबार देश की राजधानी दिल्ली से लेकर नेपाल, बांग्लादेश तक जुड़ा हुआ है। करीब दो साल पहले गाजियाबाद सीबीआई टीम ने मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से न्यू फरक्का एक्सप्रेस में सवार दो युवकों को गिरफ्तार कर उनके पास से जाली करेंसी बरामद की थी। हालांकि सीबीआई की इस कार्रवाई के दौरान गिरोह की सरगना गुलशन उर्फ भाभी वहां से फरार होने में कामयाब हो गई थी। इसके अलावा सीबीआई टीम ने मुरादाबाद स्टेशन से ही वेस्ट बंगाल निवासी कासिम और अफसल के साथ ही शालू नामक युवती को गिरफ्तार किया था। इनके पास से भी भारी मात्रा में जाली करेंसी जब्त की गई थी।
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गत शुक्रवार को एनएच-58 से जाली नोट संग पकड़े गए दो युवकों से बरामद नई करेंसी के नोटों की क्वालिटी ने देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। गाजियाबाद में नए नोटों की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद एनआईए और आईबी समेत अन्य खुफिया एजेंसियों ने गाजियाबाद में डेरा डाल दिया। खुफिया एजेंसियों की आरोपियों से की गई करीब दो घंटे की पूछताछ में जानकारी मिली है कि चीन और पाकिस्तान से वाया नेपाल और बिहार के रास्ते जाली नोट लाकर दिल्ली-एनसीआर में खपाए जा रहे हैं। वहीं, शक जताया जा रहा है कि दो हजार के नोटों की छपाई पाकिस्तान या चीन की करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में ही गई है।
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बृहस्पतिवार रात 2000 और 500 की नकली करेंसी के साथ दो युवकों के पकड़े जाने के बाद शुक्रवार सुबह सबसे पहले एनआईए (नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी) की टीम थाना सिहानी गेट पहुंची। टीम ने करीब सवा घंटे आरोपी मोहम्मद अली और विनोद से पूछताछ की। इसके बाद आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो), यूपी एसटीएफ, एटीएस और एलआईयू की टीमों ने भी दोनों आरोपियों से जानकारियां जुटाईं। सूत्रों की मानें तो दोनों से मिली जानकारी के आधार पर ही पुलिस यह दावा कर रही है कि चीन से वाया नेपाल और बिहार के रास्ते जाली नोट दिल्ली-एनसीआर में खपाए जा रहे हैं। एसएसपी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों के साथ पुलिस ने भी कई अहम जानकारी दोनों से जुटाई हैं। इनके आधार पर नकली नोट छापने वाले गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। नोटबंदी के बाद गाजियाबाद में पहली बार नई करेंसी के जाली नोट पकड़े गए हैं। ऐसे में पुलिस को शक है कि जाली नोटों के कारोबार से जुड़े कई लोग गाजियाबाद में हो सकते हैं।

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हल्के कागज से हो रही दो हजार के नोटों की पहचान: पुलिस की जांच में सामने आया है कि बरामद किए गए दो हजार की नई करेंसी के जाली नोट पहली नजर में बिल्कुल असली नोट जैसे ही दिखते हैं। नोट छापने वालों ने मंगलयान की फोटो का साइज, गांधी जी की तस्वीर के नीचे की स्ट्रिप, दाईं ओर बनी सिक्योरिटी पट्टी और बाएं किनारे पर बनी काली रेखाएं भी हूबहू छापी गई हैं। सिर्फ कागज कुछ हल्का होने के चलते जाली करेंसी की पहचान हो सकी है।
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चीन और नेपाल के रास्ते भारत में लाए जाते थे नकली नोट: पुलिस के अनुसार बिहार के रक्सौल बार्डर से नकली नोट की भारत में प्रवेश कराई जा रही है। यहां से बिहार से होते हुए यह रकम शामली के कैराना में रहने वाले अरविन नामक युवक के पास पहुंचती है। पुलिस के अनुसार कैराना को नकली नोटों की मंडी कहा जाता है। वहीं, से नोट एनसीआर के अन्य इलाकों में सप्लाई किए जाते हैं।
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एनसीआर में बढ़ी एंट्री: एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 से लेकर जून 2017 तक करीब 88 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद किए गए थे। इसी क्रम में गाजियाबाद में कौशांबी बस अड्डे से नौ लोगों को सात लाख रुपये की जाली करेंसी के साथ गिरफ़्तार किया गया था। इनका लिंक भी पाकिस्तान से ही जुड़ा था। ये लोग भी बांग्लादेश और नेपाल के रास्ते से जाली करेंसी लेकर भारत में लाकर खपाते थे।
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पाकिस्तान का नापाक खेल: पाकिस्तान भारत के खिलाफ अपने नापाक इरादों को पूरा करने में लगा है। जाली करेंसी भारत में भेजकर वह यहां की आर्थिक व्यवस्था को कमजोर करने में लगा है। भारत से पाकिस्तान गए एक खूंखार बदमाश इकबाल काना का जिक्र उस जगह जरूर होता है जहां जाली करेंसी और हथियारों की सप्लाई की बात होती है। वर्षों पहले फरार हुए इकबाल काना का पुलिस के पास कोई फोटो भी नही है। बताया जाता है कि इकबाल काना ही पाकिस्तान में रहकर जाली करेंसी भारत में खपाने को गुर्गे तैयार करता है।
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बेरोजगारों को बनाया जाता है जाली नोटों का कोरियर: जाली नोट के सौदागर ज्यादातर बेरोजगार युवकों को ही कोरियर का काम सौंपते हैं। विशेषज्ञों की माने तो चीन और पाकिस्तान से आई जाली नोटों की यह खेप नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते इंडिया में लाई जाती है। इसके लिए वेस्ट बंगाल और बिहार के बेरोजगार युवकों को लालच देकर कोरियर बनाया जाता है। सीबीआई द्वारा गिरफ्तार जाली नोटों के कुछ तस्करों से यह जानकारी मिली थी। जाली करेंसी लेकर मुरादाबाद तक आने वाले युवक को सरगना की पहचान तक नहीं होती। उसका संपर्क सिर्फ एक मोबाइल नंबर से ही रहता है, यह मोबाइल और सिम भी सरगना की ओर से दिया जाता है। डील समाप्त होने पर युवकों से मोबाइल वापस ले लिया जाता था। प्रत्येक कोरियर को जाली करेंसी की खेप के लिए पांच से दस हजार रुपये दिए जाते थे।
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