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जानें आंख होकर भी ये क्यों जिए नेत्रहीनों की जिंदगी

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बुधवार को उनके चेहरे पर पड़ने वाली धूप ऐसी कभी न थी। ना ही उन्होंने पास के रेस्त्रां से आने वाली खुश्बू को इतना कभी नहीं महसूस किया था और इससे पहले इन छात्रों को किसी के सहारे की इतनी जरूरत नहीं पड़ी थी। (फोटो साभारः द टाइम्स ऑफ इंडिया)
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ये उन वॉलेंटियरों की प्रतिक्रियाएं हैं जो नेत्रहीनों की तरह अपना एक दिन गुजार रहे थे ताकि वो महसूस कर सकें क‌ि नेत्रहीन लोग कैसे अपनी जिंदगी जीते हैं।
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ईशा नाम की एक एनजीओ जो नेत्रहीनों के लिए ब्रेल विजिटिंग, ग्रीटिंग कार्ड्स बनाने के साथ ही नेत्रहीनों के लिए वर्कशॉप भी लगाती है। इसी एनजीओ बुधवार को ब्लाइंड वॉक का आयोजन किया था।

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यह वॉक इंडियन हैबिटेट सेंटर के रेस्त्रां से शुरू हुई, जिसमें 4 वॉलेंटियर भाग ले रहे थे। उन्होंने आंखें बंद करके रेस्त्रां में घुसने की कोशिश जिसमें पूरे दस मिनट लग गए।
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इस ब्लाइंड वॉक में शामिल होने वाले वॉलेंटियरों में गुड़गांव के स्कूल ऑफ इंस्पायर्ड लीडरशिप बिजनेस स्कूल के छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं।
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वहीं ये वॉलेंटियर एक बेकरी में भी ले जाए गए जहां एक निधि नाम की लड़की ने अपना पेमेंट क्रेडिट कार्ड से किया। उसने कहा‌ कि उसने थोड़ी देर तक मशीन के बटन्स को महसूस किया फिर अपना पिन डाला। उसे ये बहुत मुश्किल तो नहीं लगा पर थोड़ा समय ज्यादा लगा।
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