जांच करते पुलिस कर्मी
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दूसरी ओर, इन फैक्टरियों में बड़ी संख्या में नाबालिगों से काम कराया जा रहा है। इन फैक्टरी में मजदूरों से किन हालात में काम कराया जा रहा था, यह देखना दिल्ली सरकार के श्रम विभाग की जिम्मेदारी है। तो क्या श्रम विभाग भी ऐसे हादसे का इंतजार कर रहा था? इन कमर्शियल बिल्डिंगों में आग से बचाव के कोई इंतजाम थे भी या नही, यह दमकल विभाग को देखना होता है। लेकिन सब अपनी-अपनी जिम्मेदारियों से बचते हैं। पुलिस भी पीछे नहीं है। बीट स्टाफ को सब पता होता है कि कहां क्या गड़बड़झाला चल रहा है, लेकिन वे भी अपना हिस्सा लेकर जुबान पर ताला लगा लेते हैं।