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इंजीनियर की मौत पर पत्नी ने दी जान, अकेली रह गई मासूम बेटी

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‘दादा जी जन्मदिन पर क्या गिफ्ट देंगे, जन्मदिन से दो दिन पहले घर आ जाना और गिफ्ट जरूर लाना। पापा-मम्मी, दादा-दादी और दोस्तों के साथ मिलकर केक काटकर खूब मस्ती करूंगी।’ ईवाना ने हर साल की तरह इस बार भी 1 दिसंबर को जन्मदिन धूमधाम से मनाने का सपना संजोया था। (सभी फोटो: भव्य नरेश रिपोर्ट: सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा)
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इंजीनियर की मौत पर पत्नी ने दी जान, अकेली रह गई मासूम बेटी

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दादा की लाडली ईवाना ने घटना से दो दिन पूर्व ही फोन पर उन्हें जन्मदिन पर आने का न्योता दिया था, लेकिन 6 वर्ष की मासूम को क्या पता था कि जन्मदिन पर उसके मां-बाप साथ नहीं रह पाएंगे। दादा-दादी को हरिद्वार से नोएडा आने की जगह ईवाना को ही साथ ले जाना पड़ेगा।
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अनुराग की बहन के ससुर ईश्वर दयाल ने बताया कि मूल रूप से हरिद्वार निवासी अनुराग अग्रवाल (39) के पिता सुरेश चंद्र अग्रवाल भेल में इंजीनियर के पद से रिटायर हुए थे। अनुराग की बहन शादी के बाद इंदिरापुरम, गाजियाबाद में शिफ्ट हो गई। अनुराग की नौकरी टेक महिंद्रा में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर लग गई और वह इंदिरापुरम शिफ्ट हो गया।

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शादी के बाद अनुराग पत्नी मोनिका (35) के साथ नोएडा के प्रतीक लोरियल सोसायटी में फ्लैट संख्या जे-803 में रहने लगा। फरवरी 2014 में अनुराग ने यहां फ्लैट खरीद लिया था। मंगलवार सुबह करीब नौ बजे ऑफिस जाने के लिए जब अनुराग तैयार हो रहा था तभी उसे हार्टअटैक आया और मौत हो गई।
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पति की मौत का सदमा मोनिका बर्दाश्त नहीं कर सकी और आठवीं मंजिल स्थित फ्लैट की बालकनी से कूदकर जान दे दी। इससे बेटी ईवाना अकेली रह गई। ईवाना फिलहाल बुआ के पास इंदिरापुरम में है।
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अनुराग-मोनिका का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर हुआ। अंतिम निवास पर अनुराग के सहकर्मी, सोसाइटी के लोग, रिश्तेदार आदि श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। इसके बाद ईवाना को प्रतीक लोरियल लाया गया। शाम फ्लैट में ताला लगा दिया गया और ईवाना को बुआ लेकर चली गई। ईवाना का 1 दिसंबर को जन्मदिन है।
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उसने माता-पिता के साथ धूमधाम से जन्मदिन मनाने का सपना संजोया था। ईवाना ने फोन कर दादा को जन्मदिन के दो दिन पूर्व ही नोएडा स्थित फ्लैट पर आने को कहा था। अब ईवाना के सपने दादा-दादी और हम सब मिलकर पूरा करने की कोशिश करेंगे।
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बृहस्पतिवार सुबह अंतिम निवास से फूल चुनने के बाद अस्थि विसर्जन करने के लिए पिता सुरेश चंद्र हरिद्वार रवाना हो जाएंगे। वह अपने साथ ईवाना को भी ले जा रहे हैं।

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