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डंपिंग ग्राउंड: तेज हुआ विरोध, सड़कों पर उतरे ग्रामीण, अखिलेश बोले- सरकार बनते ही हटवा दूंगा

Thu, 21 Jun 2018 01:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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Dumping Ground
मुख्यमंत्री से मिले आश्वासन के बाद भी प्राधिकरण के सुर बदलने के बाद सेक्टर-123 के सेनेट्री लैंडफिल साइट (डंपिंग ग्राउंड) का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को गांव की महिलाओं ने लाठी-डंडा लेकर पर्थला चौक जाम कर दिया। वहीं, गांव के लोगों और पहलवानों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सेक्टर-123 में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने दिया जाएगा। इसके लिए वह किसी भी हद तक लड़ेंगे। हालांकि इस मामले में अब तक प्राधिकरण को मुख्यमंत्री के लिखित आदेश का इंतजार है। सेक्टर-123 में बुधवार सुबह पंचायत की बागडोर महिलाओं ने संभाली। लाठीडंडों के साथ महिलाएं सड़क पर बैठ गई। उन्होंने वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। समझाने के बाद भी महिलाएं अपने स्थान से नहीं हटीं। इसके बाद आसपास के आधा दर्जन गांवों के लोग व पहलवानों ने प्रदर्शन किया। जिसमें भारतीय किसान संगठन के प्रेदश अध्यक्ष राजेंद्र यादव, जिला अध्यक्ष परविंदर यादव अपने टीम के साथ पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर राजनीतिक दल के अलावा भारतीय किसान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष योगिंदर यादव, मेरठ मंडल अध्यक्ष सुंदर सिकंदरपुर आदि लोग उपस्थित रहे।
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Dumping Ground
किन्नर समुदाय का समर्थन
डंपिंग ग्राउंड संघर्ष समिति के नेता सुखवीर पहलवान ने बताया कि किन्नर समुदाय के लोगों ने धरना स्थल पर आकर आंदोलन का समर्थन किया है। किन्नरों ने कहा कि सिर्फ आप लोग ही कचरे से होने वाले संक्रमण से प्रभावित नहीं होंगे। बल्कि हम सभी इससे प्रभावित होंगे। उन्होंने चौक व साइट स्थल का चक्कर लगाया।  किन्नरों ने गाना व डांस कर विरोध किया। उन्होंने प्रशासन व प्राधिकरण को जमकर कोसा।
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Dumping Ground
बार एसोसिएशन ने दिया मदद का आश्वासन 
डंपिंग ग्राउंड संघर्ष समिति के नेता सूबे यादव ने बताया कि संघर्ष समिति के नेतृत्व में युवा सदस्यों की टीम ने जन जागरण अभियान की शुरुआत करते हुए बार एसोसिएशन गौतम बुद्ध नगर के पदाधिकारी के साथ एक मीटिंग की। उनसे जनआंदोलन के लिए समर्थन मांगा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट राजीव तोंगड़  ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस मौके पर एडवोकेट चमन पाल सिंह, एडवोकेट जय कुमार सिंह, एडवोकेट पुनीत तंवर, एडवोकेट रजनीश यादव, ऐडवोकेट अनूप यादव, एडवोकेट महेंद्र यादव, ऐडवोकेट कर्मवीर यादव, रवि यादव, जय यादव, प्रविन्दर यादव व मितिन भाटी आदि मौजूद थे।

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Dumping Ground
प्राधिकरण बना भी देगा तो मैं हटवा दूंगा : अखिलेश 
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर कहा है कि प्रदेश में उनकी सरकार आएगी तो कूड़ा निस्तारण की नीति बनाई जाएगी। जहां लाखों लोग बसे हुए हैं वहां पर कूड़ा घर नहीं बनना चाहिए। साथ ही आश्वासन दिया कि अगर बीजेपी सरकार वहां पर डंपिंग ग्राउंड बनाती है तो जब उनकी सरकार आएगी तो वहां से डंपिंग ग्राउंड को हटा देगी। बुधवार को डंपिंग ग्राउंड की समस्या को लेकर सपा का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित उनके आवास पर मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने समस्या से संबंधित ज्ञापन अखिलेश को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सघन आबादी के बीच में डंपिंग ग्राउंड बनाया जाना लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा। प्राधिकरण जबरन वहां पर डंपिंग ग्राउंड बनाने पर तुला है। स्वच्छ वातावरण में सांस लेना सबका मौलिक अधिकार है लेकिन वह भी हमसे छीन जा रहा है। जनता कई महीनों से सड़क पर है लेकिन जनता की आवाज को प्राधिकरण नहीं सुन रहा है। सभी लोगों ने इस मुद्दे पर अखिलेश से मदद करने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष बीर सिंह यादव, पूर्व प्रत्याशी सुनील चौधरी, राघवेंद्र दुबे, भरत प्रधान, दलवीर यादव, ओमपाल राणा आदि शामिल रहे।
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विकल्प के बारे में कोई नहीं बोलना चाहता
सेक्टर-123 में नोएडा प्राधिकरण के कूड़ा डालने का विरोध स्थानीय लोगों ने शुरू किया था। यह अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। आलम यह है कि इसके विकल्पों पर कोई भी नहीं बोलना चाहता। मंगलवार को नोएडा प्राधिकरण, केंद्रीय मंत्री और स्थानीय विधायक के साथ हुई बैठक बेनतीजा रहने की वजह से मामला और गंभीर हो गया है। वजह यह कि बैठक बेनतीजा होने की वजह से और बड़ा प्रदर्शन होने की बात कही जा रही है। कूड़े के निपटारे का क्या विकल्प हो सकता है इस पर लगातार मंथन चल रहा है। हालांकि कोई भी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच सका है।
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सेक्टर-123 में कूड़ा डालना बंद होेने पर क्या होगा?
 जैसी से सेक्टर-123 में कूड़ा डालना बंद होगा। वैसे ही पूरे शहर में कूड़े पर कोहराम शुरू हो जाएगा। क्योंकि सेक्टर-54 में जब कूड़ा डालना बंद हुआ था तो शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए थे। यही वजह है कि कोई भी नेता या अधिकारी इस मामले में आगे नहीं आना चाहता। 

सेक्टर-151 ए का विकल्प भी इतना नहीं आसान
सेक्टर-151ए में अगर कूड़ा डालने का फैसला ले भी लिया जाता है तो यह प्राधिकरण के लिए एकदम से आसान फैसला नहीं होगा। वहां भी 500 मीटर पर आबादी है। यही नहीं वहां लैंडफिल साइट और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए कागजी कार्रवाई में भी काफी समय लगने की बात कही जा रही है।
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कोर्ट से ही अब उम्मीद लगा रहे लोग
सेक्टर-123 में कूड़ा डालने का फैसला एनजीटी का है। प्राधिकरण भी विरोध करने वालों को कोर्ट जाने की सलाह दे रहा है। कोर्ट ही इस पर कोई अहम फैसला कर सकता है। 
अस्तौली का काम क्यों रुका
नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच संयुक्त तौर पर अस्तौली में एक प्लांट लगाने की योजना बनी थी। इसके डीपीआर पर सात लाख रुपये भी खर्च किए गए। लेकिन बाद में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इस मामले में तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन बृजेश कुमार और नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन वीके मल्होत्रा ने 2002-03 के दौरान इस प्रस्ताव पर पहली बार चर्चा की थी। वर्ष 2013 में शासन ने अस्तौली में पर्यावरण क्लियरेंस भी दे दिया था। प्लांट के लिए तत्कालीन चेयरमैन रमा रमण के कार्यकाल में ईओआई भी आमंत्रित कर ली गई थी।
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Dumping Ground
प्लान बीजेपी के शासनकाल का नहीं
डॉ. महेश शर्मा, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, सेक्टर-123 में लैंडफिल साइट का प्लान बीजेपी के शासनकाल का नहीं है बल्कि काफी पहले का है। लिहाजा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। कूड़े के समाधान के अन्य विकल्पों की तलाश जारी है। 

बातचीत के बाद होगी कार्रवाई 
सतीश महाना, उद्योग मंत्री ने कहा कि, कूड़े पर रोजाना हो रहे धरना प्रदर्शन की जानकारी है। आखिर शहर का कूड़ा कहां डाला जाए, यह एक बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री ने जो भी कहा है उस पर आगे की बातचीत के बाद कार्रवाई की जाएगी। 
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